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ट्रंप ने खतरे में डाली 13 देशों के 20 करोड़ लोगों की जान, 90 फीसदी अमेरिकी भी परेशान

डोनाल्ड ट्रंप का बतौर अमरीकी राष्ट्रपति दूसरा कार्यकाल अमरीका और बाकी दुनिया पर भारी पड़ रहा है।

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Mar 07, 2026
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (Photo - Washington Post)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘टैरिफ वार’ के जरिए पूरी दुनिया को आर्थिक रूप से खतरे में डाल ही रखा था। अब 'रियल वार' छेड़ कर उन्होंने 13 देशों के करीब 20 करोड़ लोगों की जान सीधे तौर पर जोखिम में डाल दी है। 28 फरवरी, 2026 को उन्होंने इजरायल के साथ मिल कर ईरान पर जो हमला बोला उससे एक दर्जन से ज्यादा देशों के लोग सीधे तौर पर खतरे में हैं। वैसे इस जंग की वजह से परेशानी झेलने वाले देशों की संख्या दर्जनों और लोगों की संख्या अरबों में है।

टैरिफ वार हो या असली जंग, दोनों ही सूरतों में ट्रंप अपने लोगों के लिए भी बड़ी परेशानी खड़ी कर रहे हैं। उनके फैसलों से अमरीकियों की मुश्किल तो बढ़ती ही जा रही है, दुनिया भी खतरे की जद में आती जा रही है।

करीब 20 करोड़ लोगों पर खतरा

देशप्रभावित होने का मुख्य कारणअनुमानित जनसंख्या
ईरानमुख्य युद्ध क्षेत्र और संभावित हमलों का केंद्र।9.15 करोड़
इराकयहाँ ईरान समर्थक मिलिशिया और अमेरिकी सैन्य ठिकाने दोनों हैं।4.75 करोड़
इजरायलईरान का कट्टर प्रतिद्वंदी। अमेरिका के साथ युद्ध में शामिल। 96 लाख
लेबनानईरान समर्थित 'हिजबुल्लाह' का गढ़ होने के कारण इजरायली हमलों की चपेट में।52 लाख
यमनहूतियों (Houthis) द्वारा लाल सागर और सऊदी अरब पर हमलों के कारण संघर्ष का विस्तार।3.65 करोड़
सऊदी अरबईरान का क्षेत्रीय प्रतिद्वंदी। अमरिकी अड्डों पर हुए हमले। और तेल रिफाइनरियों पर बड़े हमलों का खतरा।3.82 करोड़
यूएई (UAE)होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास होने के कारण व्यापारिक और सैन्य जोखिम।97 लाख
बहरीन यहां अमरीकी नौसेना का बड़ा अड्डा है। 16 लाख
जॉर्डन सीरिया और इराक से लगती सीमा वाले इलाके में अमरीकी ठिकाने हैं। 1.25 करोड़
कुवैत तेल सप्लाई और अमरीकी मौजूदगी के ठिकाने। 50 लाख
ओमानतेल भंडार, बंदरगाह। 55 लाख
कतरयहाँ अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा (Al Udeid) है।28 लाख

लड़ाई लंबी खिंची तो ईंधन के दाम बढ़ने से पूरी दुनिया की आर्थिक तरक्की की रफ्तार को झटका लगने का अंदेशा है। तेल महंगा हुआ तो महंगाई बढ़नी भी तय है। महंगाई बढ़ी तो बैंक कर्ज भी महंगा करेंगे। नतीजा लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसे नहीं रहेंगे और आर्थिक विकास का पहिया थम जाएगा। एक सीमा के बाद अमेरिका भी अपने तेल उत्पादन के दम पर इसे रोक नहीं पाएगा। जान-माल की जो क्षति हो रही है, वह तो हो ही रही है।

US-Israel, Iran War: 12 मार्च तक हुई मौतें

US-Israel Iran War की जद में आए 12 देशों में 12 मार्च को भारतीय समय के मुताबिक शाम पांच बजे तक मारे गए और घायल लोगों की संख्या। यह संख्या ईरान सरकार, संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राजनयिक और विश्व स्वास्थ्य संगठन के हवाले से है। (infograph desigh: patrika.com)

ट्रंप मनमाने तरीके से फैसले ले रहे हैं। अमरीकियों की मर्जी का भी ख्याल नहीं रख रहे हैं। युद्ध शुरू होने से पहले हुए इकोनॉमिस्ट/यूगव (Economist/YouGov)के पोल में महज 27 फीसदी अमरीकियों ने माना था कि अमरीका को ईरान पर हमला करना चाहिए। 27 फरवरी से 2 मार्च के बीच हुए सर्वे में हमले का समर्थन करने वाले मात्र पांच फीसदी रह गए थे।

दस में से नौ अमरीकी परेशान

टैरिफ के मामले में भी यही हाल है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा अमरीकियों को ही भुगतना पड़ रहा है। करीब 90 फीसदी अमेरिकी जनता ट्रंप की नीतियों के चलते सीधे तौर पर परेशानी झेल रही है। एक हालिया सर्वे में दस में से नौ अमरीकियों ने माना है कि उनके लिए जीवन-यापन मुश्किल हो रहा है। सर्वे में शामिल 87 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनके लिए साधनों की उपलब्धता में कमी आई है, जिसके चलते वे मुश्किल में हैं।

फिर भी, ट्रंप कह रहे हैं कि इससे अमेरिका को फायदा हो रहा है। पिछले महीने ‘स्टेट ऑफ द यूनियन अड्रेस’ में भी उन्होंने अमरिकी अर्थव्यवस्था की सुनहरी तस्वीर दिखाई, जबकि आंकड़े और विशेषज्ञ इस तस्वीर को धुंधली बता रहे हैं। उनकी राय में ट्रंप की नीतियां अमेरिका को तत्काल तो नहीं, लेकिन आने वाले सालों में मंदी की ओर धकेल सकती हैं।

ट्रंप ने टैरिफ का खेल खेल कर अमरीकी जनता को महंगाई के जाल में फंसा दिया है, क्योंकि टैरिफ का 90 फीसदी बोझ अमरीकी लोगों और कंपनियों को ही उठाना पड़ रहा है। फेडरल रिजर्व बैंक के एक हालिया विश्लेषण में कहा गया था कि 2025 में टैरिफ का करीब 90 फीसदी असर अमरीकी उपभोक्ताओं और कंपनियों ने झेला। विदेशी निर्यातकों पर इसका बहुत कम बोझ पड़ा।

लोगों के लिए सामान महंगा होने और महंगाई दर ऊपर रहने के चलते केंद्रीय बैंक कर्ज भी सस्ता नहीं कर पा रहा है। ऐसे में लोगों के लिए लोन लेना भी मुश्किल हो रहा है।

ज्यादा परेशानी, थोड़ी कामयाबी

इन मोर्चों पर जूझते हुए ट्रम्प कई कदम उठा रहे हैं और उन्हें थोड़ी कामयाबी भी मिल रही है। लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसा रहे, इसके लिए उन्होंने 'वन बिग ब्यूटीफूल एक्ट' के जरिए अमरीकी इतिहास की सबसे बड़ी टैक्स कटौती की। इसके तहत कई चीजों को टैक्स फ्री किया गया। उन्होंने 'ग्रेट हेल्थ केयर प्लान' लॉंच कर दवाइयां सस्ती कीं।

ट्रंप मनमाना टैरिफ लगाते जा रहे हैं। आलम यह है कि गौतम अदानी सुनवाई के लिए यूएस नहीं जा रहे तो भारत के सोलर प्लांट पर 126 फीसदी टैरिफ लगा दिया। लेकिन, अभी टैरिफ का 90 फीसदी बोझ अमरीकी जनता और कंपनियों को ही उठाना पड़ रहा है। संभव है यह बोझ नहीं पड़ता तो इनकम टैक्स से सरकारी खजाने में ज्यादा पैसे आ जाते, क्योंकि वित्त वर्ष 2025 में इनकम टैक्स से 2.7 खरब डॉलर मिले थे, जबकि टैरिफ से 200 अरब डॉलर ही आए।

ट्रंप के आने से बढ़ा मंदी का खतरा

वॉशिंग्टन पोस्ट के एक पोल में करीब आधे अमरीकियों ने कहा कि ट्रंप के आने के बाद से अर्थव्यवस्था खराब हुई है।

इकनॉमिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने एक शोधपरक आलेख में बताया है कि ट्रंप की नीतियों से मंदी आने का खतरा है। इसमें मांग, आपूर्ति और वितरण की स्थितियों का विश्लेषण किया गया है। मांग और आपूर्ति बनी रहे, इसके लिए बेरोजगारी और महंगाई को लगातार निचले स्तर पर रखना होगा। इसके लिए हर लेवल (निजी, सरकार और कंपनियां) पर खर्च बढ़ाना होगा। आपूर्ति बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने की जरूरत होगी। वितरण के मोर्चे पर अमीर-गरीब की खाई पाटनी होगी। आय कि असमानता पर काबू पाना होगा। कुछ ऐसी ही उम्मीदें दिखा कर ट्रंप दूसरी बार सत्ता में आए थे, लेकिन लगातार जनता की नाउम्मीदी ही बढ़ा रहे हैं।

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