
India-US Trade tarrif: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर मुंबई में बुधवार को कहा कि समझौता लगभग तय हो चुका है और हम 99 प्रतिशत तक पहुंच चुके हैं। एक प्रतिशत पर काम चल रहा है, लेकिन इस बीच अमेरिका के एक बार फिर भारत को टैरिफ का झटका देने की खबर आई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय ने भारत, चीन, जापान समेत 54 देशों से होने वाले इंपोर्ट पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल भारतीय उत्पादों पर 10 फीसदी बेसलाइन टैरिफ है। अतिरिक्त टैरिफ लगाया तो यह बढ़कर 22.5 प्रतिशत हो जाएगा।
यूएसटीआर ने यह फैसला ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत लिया गया है। अमेरिका का मानना है कि इन अहम व्यापारिक साझेदारों की ओर से जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर रोक न लगाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर एक असमान बाजार में प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। जिसे अमरीका बर्दाश्त नहीं करेगा। इस संबंध में यूएसटीआर ने 12 मार्च, 2026 को 60 देशों से होने वाले अमरीका के कुल 99.4 प्रतिशत आयात के मामले में अलग-अलग जांच शुरू की थी।
वहीं, अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है मंगलवार को सीनेट की उपसमिति के सामने कहा कि अमरीका जल्द रूसी तेल पर दी गई छूट को खत्म कर देगा। ईरान युद्ध के कारण अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए रूसी तेल की खरीद पर लगे प्रतिबंधों को दो बार हटाया है। इससे भारत समेत कई देशों ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई है।
वहीं यूएसटीआर ने भारत के संबंध में कहा है कि भारत की नीतियां अमरीकी वाणिज्य को बाधित करती हैं। भारत 12.5 प्रतिशत टैरिफ रेट वाली श्रेणी में शामिल है। वहीं भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने इस बाबत कहा है कि भारत सेक्शन-301 की कार्यवाही को लेकर अमरीका के साथ संवाद बनाए हुए है।
यहां आपको बता दें कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत लगभग डेढ़ साल से चल रही है, जबकि यूरोपीय संघ के भारत के साथ व्यापार समझौते में लगभग 19 साल लगे थे।