
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच रविवार को आखिरकार डील हो ही गई। यह डील करीब 4 महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से पूरी तरह से खोलने और ईरानी परमाणु प्रोग्राम पर आगे की बातचीत का रास्ता तैयार करती है। दोनों देशों के बीच इस डील पर आधिकारिक तौर पर 19 जून को स्विट्रज़रलैंड (Switzerland) में हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसी दौरान डील से जुड़ी सभी शर्तें भी स्पष्ट हो जाएंगी। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने डील से जुड़ी एक बात को फर्जी बता दिया है।
दोनों देशों के बीच डील होने से पहले ही सोशल मीडिया पर खबर फैल रही थी कि अमेरिका की तरफ से ईरान को हर्जाने के तौर पर 300 मिलियन डॉलर की धनराशि दी जाएगी, लेकिन अब ट्रंप ने इन अफवाहों पर विराम लगा दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जता दी है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिका द्वारा ईरान को 300 मिलियन डॉलर देने की खबर को भी फेक न्यूज़ बताया और कहा कि यह फर्जी खबर डेमोक्रेट्स ने फैलाई है।
ट्रंप ने बताया कि शुक्रवार, 19 जून को होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुल जाएगा। इससे दुनियाभर में तेल-गैस के संकट से राहत मिलेगी। अमेरिका ने नाकेबंदी हटा ली है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह से खुलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते में पाकिस्तान (Pakistan) ने अहम भूमिका निभाई। इस पूरी डील में पाकिस्तान प्रमुख मध्यस्थ रहा। पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) और आर्मी चीफ आसिम मुनीर (Asim Munir) के नेतृत्व में पाकिस्तान के ज़रिए ही दोनों देशों में अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत चली और लगातार संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। पाकिस्तानी मंत्री लगातार ईरान और अमेरिका के संपर्क में रहे और दोनों देशों के बीच बातचीत को रुकने नहीं दिया। इसी वजह से ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी डील संभव हो पाई। 19 जून को स्विट्रज़रलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच हुई डील के आधिकारिक हस्ताक्षर कार्यक्रम में भी पाकिस्तान के पीएम और अन्य मंत्री मौजूद रह सकते हैं।