
अमेरिका (United Staes of America) ने इराक (Iraq) से अपने सभी सैनिकों को हटा लिया है! आज, सितंबर 30 को इराक के आखिरी सैन्य ठिकाने पर बचे हुए अमेरिकी सैनिक भी देश छोड़कर चले गए! आखिरी बचे हुए अमेरिकी सैनिक इराक के अर्बिल एयर बेस (कुर्द क्षेत्र) से निकल गए हैं। इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी (Ali al-Zaidi) ने इसे संप्रभुता का नया अध्याय बताया। इराक में “संप्रभुता दिवस” मनाया जा रहा है। हालांकि अमेरिका के इस फैसले से सिर्फ इराकी ही नहीं, बल्कि ईरान (Iran) के सहयोगी भी काफी खुश हैं!
इराक से अमेरिकी सेना के हटने का फायदा ईरान के सहयोगियों को मिलेगा! इराक से अमेरिकी सेना के हटने के बाद ईरान के सहयोगी और मज़बूत हो सकते हैं! इसी वजह से ईरान के सहयोगी जश्न मना रहे हैं। इराक अक्सर ही ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध का मैदान भी रहा है! इस साल फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से मारे गए 19 अमेरिकी सैनिकों में से 7 की मौत इराक में हुई। अमेरिकी सेना की गैरमौजूदगी में अब इराक में रहने वाले ईरानी सहयोगियों की ताकत बढ़ेगी!
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान समर्थित समूह अब इराक में सरकारी नीतियाँ तय करने और अहम संस्थानों में अपनी पकड़ मजबूत करने में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। अमेरिकी सेना के इराक छोड़ने के बाद ईरान समर्थित हथियारबंद गुटों के समूह इस्लामिक रेज़िस्टेंस इन इराक के कमांडर अबू मुज्तबा अल-यासिरी ने कहा कि यह सभी इराकी इस्लामिक रेज़िस्टेंस समूहों और सम्मानजनक इराकियों के लिए एक ऐतिहासिक जीत है और अमेरिकी प्रोजेक्ट के लिए करारी हार है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी सेना के जाने से इराक में ISIS भी एक बार फिर मज़बूत हो सकता है, जो पिछले कुछ सालों में काफी कमजोर हो गया था!
अमेरिकी सेना लंबे समय तक इराक में रही। मार्च 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले के बाद अमेरिकी सेना करीव 8.5 साल यानी 2011 तक इराक में रही। दिसंबर 2011 में अमेरिकी सेना इराक से हटी। 2011–2014 तक करीब 3 साल इराक में अमेरिका की कोई स्थायी सैन्य टुकड़ी तैनात नहीं थी। 2014 में ISIS के खिलाफ जंग के लिए इराकी सरकार की गुज़ारिश पर अमेरिका ने फिर अपनी सेना भेजी, जो 12 साल तक वहाँ रही।