US Troops' Exit From Niger: अमेरिकी सेना के नाइजर छोड़ने की शुरुआत हो गई है।
पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजर (Niger) में पिछले साल 26 जुलाई को सेना ने राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम (Mohamed Bazoum) को सत्ता से हटाकर गिरफ्तार कर लिया था और तख्तापलट करते हुए सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था। तख्तापलट के बाद से ही नाइजर में हालत पूरी तरह से बदल गए थे। तख्तापलट के बाद नाइजर की सेना के कई देशों से संबंध पूरी तरह बदल गए और उन्होंने फ्रांस (France) के राजदूत के साथ ही सेना को भी देश से बाहर कर दिया गया था। कुछ महीने पहले नाइजर की सेना ने अमेरिका (United States Of America) से सैन्य समझौता खत्म करने का फैसला लिया था और अमेरिकी सेना को तुरंत देश छोड़ने के लिए भी कह दिया था। पहले अमेरिका ने अपनी सेना निकालने पर सहमति नहीं दी थी पर उसके बाद अमेरिका और नाइजर में अमेरिकी सेना के अफ्रीकी देश छोड़ने पर सहमति बन गई थी। अब इस काम की शुरुआत भी हो गई है।
अमेरिकी सेना के नाइजर छोड़ने का पहला चरण हुआ पूरा
अमेरिकी सेना के नाइजर छोड़ने का पहला चरण हुआ पूरा हो गया है। नाइजर की राजधानी नियामी में एयर बेस 101 पर अमेरिकी सेना के अधिकारी ने नाइजर की सेना अधिकार हस्तांतरित करते हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए। साथ ही एयर बेस 101 से अमेरिकी सैनिक अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं।
किस दिन तक छोड़ना होगा देश?
अमेरिका और नाइजर में सहमति बनी है कि अमेरिकी सेना को 15 सितंबर तक नाइजर छोड़ना होगा। पहला चरण पूरा हो गया है और 15 सितंबर तक सभी अमेरिकी सैनिक नाइजर छोड़ देंगे।
ड्रोन बेस से धोना पड़ेगा हाथ
नाइजर में अमेरिका का एक बड़ा ड्रोन बेस भी है। इस ड्रोन बेस की वैल्यू करीब 100 मिलियन डॉलर्स है और इस बेस पर कई अटैक ड्रोन्स हैं। अमेरिका के कुछ विमान भी इस ड्रोन बेस पर हैं। ऐसे में नाइजर से अमेरिकी सेना के निकलने पर अमेरिका को इस ड्रोन बेस से हाथ धोना पड़ेगा। हालांकि अमेरिका अपने ड्रोन्स और विमान और इसके अलावा दूसरे हथियारों को ले जा सकता है, पर ड्रोन बेस को नहीं, जो अमेरिका के सबसे बड़े ड्रोन बेस में से एक है।
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