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रूसी तेल खरीदने पर भारत-चीन को अमेरिका की चेतावनी, BRICS खत्म होते ही टैरिफ को लेकर बढ़ी चिंता

BRICS USA Warning: रूसी तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत और चीन पर दबाव बढ़ाया है। BRICS के बाद टैरिफ की धमकी से दोनों देशों की चिंता बढ़ सकती है। हालांकि भारत ने इस मुद्दे पर अमेरिका को स्पष्ट प्रतिक्रिया दे दी है।
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Sep 17, 2026
BRICS USA Warning
BRICS में एक साथ नजर आए थे भारत-रूस और चीन। अमेरिका ने दी धमकी। फोटो में बाएं तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, दाएं तरफ रसिया के प्रेसिडेंट पुतिन, पीएम मोदी और चाइना के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग। (सोर्स- आईएएनएस)

US Tariff Warning India-China:18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में किया गया था। इस दौरान भारत-रूस और चीन एक साथ नजर आए थे। ब्रिक्स समिट पर अमेरिका भी नजर बनाए हुए था। समिट खत्म होते ही उसने अपनी पुरानी चाल चल दी। तीनों देशों की बढ़ती नजदकियों के कारण उसने एक बार फिर टैरिफ वाला दाव खेल दिया है। यही कारण है कि इस वक्त रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर मामला बढ़ गया है। अमेरिकी के सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को रूस से तेल खरीदने के बजाय दूसरे देशों से ऊर्जा लेने की सलाह दी है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा बड़ा बिल पास किया है।

इस कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लग गया है। बस यह कानून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कुछ परिस्थितियों में ऐसे टैरिफ लगाने की अधिकार देता है।

ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को क्या कहा?

सीनेटर (सांसद) रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को सीधे संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को रूस से तेल और गैस खरीदने के बजाय दूसरे स्रोतों से ऊर्जा लेनी चाहिए।

उनकी यह टिप्पणी अमेरिका में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिशों के बीच आई है। ब्लूमेंथल इस कानून के समर्थकों में शामिल रहे हैं। जुलाई में उन्होंने कहा था कि रूस से तेल खरीदने वालों पर दबाव बढ़ाना इस कानून का एक अहम उद्देश्य है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को 262-159 वोटों से मंजूरी दी। इससे पहले सीनेट इसे 86-11 वोटों से पारित कर चुकी थी। अब बिल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है।

क्या भारत पर लग सकता है 100% टैरिफ?

नए कानून में रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर 100% तक अतिरिक्त ड्यूटी लगाने का प्रावधान है। इसमें रूस से तेल खरीदने वाले बड़े आयातकों को निशाना बनाने की व्यवस्था है।

इसके अलावा रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव हर 180 दिन में संबंधित देशों की समीक्षा कर सकता है। बिल में रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा क्षेत्र और कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर भी प्रतिबंधों का प्रावधान है। रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने की व्यवस्था भी इसमें शामिल है।

भारत ने क्या कहा?

भारत ने अपनी राय अमेरिका के सामने बिलकुल स्पष्ट रखी। उसने ऊर्जा जरूरतों (एनर्जी रिसोर्सेज) को प्राथमिकता देने की बात कही है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत 140 करोड़ से ज्यादा लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में वह अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखेगा। वह किसी के दबव में नहीं आएगा। मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है।

इस पूरे मामले में अब नजर आगे की प्रक्रिया पर है। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि अमेरिकी प्रशासन नए कानून के तहत किन देशों पर कार्रवाई करता है और उसका भारत की ऊर्जा खरीद पर क्या असर पड़ता है।

Updated on:
17 Sept 2026 02:56 pm
Published on:
17 Sept 2026 02:01 pm