
फोटो में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (सोर्स- /@ANI स्क्रीनशॉट)
India-Bangladesh 101 Agreements Latest Update: बांग्लादेश की नई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) नेतृत्व वाली सरकार ने भारत के साथ रिश्तों से जुड़े 101 समझौतों और समझौता ज्ञापनों की समीक्षा शुरू की है। इस खबर के सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और पोर्ट एक्सेस को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासतौर पर भारत को चटगांव और मोंगला बंदरगाहों तक मिली पहुंच और इससे जुड़े समझौतों पर नजर है। बांग्लादेश सरकार इन समझौतों में किसी तरह के बदलाव या पुनर्विचार की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
हालांकि, भारत को इस रिव्यू के बारे में बांग्लादेश की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। इस पूरे मामले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत ने मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये 101 समझौते क्या हैं और इनका भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
दरअसल, भारत और बांग्लादेश के बीच ‘101 एग्रीमेंट’ दोनों देशों के बीच हुए एमओयू है। जिनमें व्यापार, कनेक्टिविटी, बंदरगाह और दूसरी व्यवस्थाएं शामिल हैं। अब इन्ही ‘101 एग्रीमेंट’ का बांग्लादेश की मौजूदा सरकार समीक्षा कर रही है। बीएनपी नेता नूरुल इस्लाम मोनी के मुताबिक, सभी समझौतों को जांच के दायरे में रखा गया है। वर्तमान सरकार का कहना है कि भारत से दोस्ताना रिश्ते बनाए रखना जरूरी है। लेकिन समझौतों में बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। कुछ समझौतों में बदलाव हो सकता है। कुछ को जारी रखा जा सकता है। फिलहाल किसी समझौते को रद्द करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
चटगांव यानी चटोग्राम पोर्ट भारत के लिए खास महत्व रखता है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत भारत इस बंदरगाह के जरिए अपने सामान की आवाजाही कर सकता है। इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक सामान पहुंचाने का सबसे तेज और वैकल्पिक रास्ता है। पहले इन राज्यों के लिए मुख्य निर्भरता सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर थी। बता दें इसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है।
बांग्लादेश के रास्ते से दूरी और परिवहन समय कम हो सकता है। समुद्री और नदी मार्ग का इस्तेमाल होने से लॉजिस्टिक्स लागत भी घट सकती है। इसी वजह से 101 समझौतों की समीक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण है। अगर बंदरगाह या ट्रांजिट से जुड़े नियम बदले जाते हैं, तो पूर्वोत्तर की सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।
Updated on:
18 Sept 2026 05:48 pm
Published on:
18 Sept 2026 05:31 pm
