1926 से लंदन की शान रहे 'वीरास्वामी' रेस्टोरेंट पर अस्तित्व का संकट! किंग चार्ल्स को सौंपी गई 20,000 हस्ताक्षरों वाली याचिका। जानिए क्यों दुनिया के दिग्गज शेफ और हजारों समर्थक भारत-ब्रिटेन की इस 100 साल पुरानी साझी विरासत को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
ब्रिटेन का सबसे पुराना और ऐतिहासिक भारतीय रेस्टोरेंट 'वीरास्वामी' अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। मार्च 1926 में स्थापित इस संस्थान को खाली करने के नोटिस के खिलाफ समर्थकों ने बकिंघम पैलेस के बाहर "कड़ी और शांति बनी रहे" के नारों के साथ प्रदर्शन किया और किंग चार्ल्स को 20,000 हस्ताक्षरों वाली याचिका सौंपी।
रेमंड ब्लैंक और मिशेल रॉक्स जैसे दिग्गज शेफ ने भी इसे बचाने के लिए हस्ताक्षर किए हैं। अपनी शुरुआत से ही रीजेंट स्ट्रीट के 'विक्ट्री हाउस' में चलता आ रहा यह रेस्टोरेंट भारत-ब्रिटेन सांस्कृतिक संबंधों का अटूट प्रतीक है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान भी यह निर्बाध सेवाएं देता रहा।
रेस्टोरेंट के मालिक रंजीत मथानी ने किंग चार्ल्स से अपील की है कि वे इसे 'विलुप्त' होने से बचाएं। उन्होंने 'क्राउन स्टेट' द्वारा लीज रिन्यू न करने को निर्णय को अदूरदर्शिता बताते हुए कहा कि 100 साल के इतिहास को कूड़ेदान के हवाले किया जा रहा है। 2016 में मिशेलिन स्टार हासिल करने वाला यह रेस्टोरेंट हैमलेज और लिबर्टी के साथ रीजेंट स्ट्रीट का सबसे पुराना किराएदार है।
क्राउन एस्टेट इस ग्रेड-II लिस्टेड इमारत का आधुनिकीकरण करना चाहता है। प्लानिंग डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि नए बदलावों के बाद रेस्टोरेंट का प्रवेश द्वार ही बंद हो जाएगा। जहां क्राउन एस्टेट इसे 'सार्वजनिक धन के प्रबंधन' की जिम्मेदारी बता रहा है, वहीं 21 साल से यहां काम कर रहीं सोनिया कैनावो जैसी कर्मचारी और नियमित ग्राहक इसे एक बेशकीमती संस्थान की हत्या मान रहे हैं।