शोधकर्ताओं का तो यहां तक दावा है कि ग्रीन हाउस गैसों (Greenhouse Gas) के इस उत्सर्जन में 71 फीसदी की कमी हो सकती है, अगर फ्रोजन मांस (Frozen meat) लसग्ना के बजाय शाकाहारी विकल्प को तवज्जो दी जाए।
खाने की आदतों में मांसाहार की जगह शाकाहारी भोजन (Vegetarian) पर जोर देने से साल भर में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 26 फीसदी की कमी की जा सकती है, साथ ही इससे होने वाले पर्यावरण और सेहत को नुकसान में कमी आने से करोड़ों डॉलर की बचत भी की जा सकती है। लंदन के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ एंड इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं का तो यहां तक दावा है कि ग्रीन हाउस गैसों (Greenhouse Gas) के इस उत्सर्जन में 71 फीसदी की कमी हो सकती है, अगर फ्रोजन मांस (Frozen meat) लसग्ना के बजाय शाकाहारी विकल्प को तवज्जो दी जाए।
नेचर फूड पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन को किसी देश के खाद्य सामग्री खरीद का पर्यावरणीय पर असर की दिशा में अब तक का सबसे विस्तृत अध्ययन माना जा रहा है। शोधकर्ताओं ने मांग की है कि सभी प्रकार के डिब्बाबंद खाने पर इससे जुड़े ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन का विवरण भी दिया जाना चाहिए।
शोधकर्ताओं ने सबसे पहले 7,000 ऑस्ट्रेलियाई घरों से वार्षिक रोजमर्रा की खाद्य सामग्री की खरीदारी का आकलन कर उससे होने वाले अनुमानित ग्रीन हाउस गैसों (Greenhouse Gas) के उत्सर्जन की गणना की। इस क्रम में 22,000 से अधिक उत्पादों को खाद्य पदार्थों की अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया। इसके बाद जॉर्ज इंस्टीट्यूट के 'फूडस्विच' डेटाबेस के आधार पर उसके वैश्विक पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया गया। जिससे विभिन्न खाद्य समूहों के बीच अदला-बदली करके बचाए गए उत्सर्जन को मापा जा सके।
इंस्टीट्यूट के डाटाबेस के अनुसार, वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग एक तिहाई हिस्सा खाद्य और कृषि क्षेत्र से आता है। इस वैश्विक खाद्य प्रणाली की स्वास्थ्य और पर्यावरणीय के लिए संयुक्त लागत प्रति वर्ष लगभग 10 से 14 लाख करोड़ डॉलर है।
जार्ज इंस्टीट्यूट ने खाद्य प्रणाली की इस अदला-बदली को सुगम बनाने के लिए एक ईकोस्विच नामक एप भी बनाया है। ऑस्ट्रेलिया में ही उपलब्ध इस एप के जरिए कोई भी खरीदार अपने फोन से बॉरकोड स्कैन कर संबंधित उत्पाद से होने वाले ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को जान सकता है।
इस अध्ययन से पता चलता है कि राष्ट्रीय खाद्य नीतियों में सस्टेनेबिलिटी के लक्ष्यों को शामिल करने से उपभोक्ताओं पर बोझ डाले बिना वैश्विक पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सीधे मदद मिल सकता है। यही कारण है कि हम उच्च उत्सर्जन वाले खाद्य उत्पादों (मांसाहार) को कम करने वाले एक सशक्त कानून की तत्काल मांग कर रहे हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि अदला-बदली भी सेहतमंद और पौष्टिक साबित हो सकती है। इस अदला-बदली से अल्ट्रा-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की खरीद अनुपात में थोड़ी कमी आएगी, जो एक सकारात्मक परिणाम है क्योंकि वे आम तौर पर कम स्वस्थ होते हैं।