US Strikes Venezuela: वेनेजुएला की राजधानी काराकास में अमेरिकी एयर स्ट्राइक से हड़कंप, राष्ट्रपति मादुरो ने लगाई इमरजेंसी। रूस और चीन ने अमेरिका को दी गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी, क्या शुरू होगा विश्व युद्ध?
Venezuela Missile Attacks: वेनेजुएला की राजधानी काराकास ( US Airstrike Caracas) में हुए हालिया धमाकों ने पूरी दुनिया को दो धड़ों में बांट दिया है। अमेरिका की 'सर्जिकल स्ट्राइक' की खबरों के बीच अब दुनिया की महाशक्तियां आमने-सामने आ गई हैं। रूस और चीन ने इस सैन्य कार्रवाई को सीधे तौर पर वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया है, वहीं संयुक्त राष्ट्र (UN) में इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ गई है। ध्यान रहे कि अमेरिका ने वेनेजुएला के सैन्य ठिकानों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' (Russia China Venezuela Support) शुरू कर दी है। इन धमाकों के तुरंत बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने पूरे देश में 'इमरजेंसी' (Nicholas Maduro Emergency) लागू कर दी है, जिससे लैटिन अमेरिका में एक बड़े युद्ध की शुरुआत मानी जा रही है। कोरिया के किम जोंग ने यूएस को खुली चेतावनी दी कि यदि मादुरो को तुरंत रिहा नहीं किया गया तो तीसरा विश्व युद्ध हो सकता है।
"हम दोस्त को अकेला नहीं छोड़ेंगे"रूस के राष्ट्रपति पुतिन के करीबी अधिकारियों और विदेश मंत्रालय ने इस हमले को "खुली आक्रामकता" करार दिया है। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अमेरिका के इस कदम को 'काउबॉय बर्ताव' (Cowboy Behavior) कहा है। रूस का स्पष्ट मानना है कि अमेरिका ड्रग्स के खात्मे के बहाने वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण करना चाहता है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि वेनेजुएला की संप्रभुता को और अधिक नुकसान पहुँचाया गया, तो वह मूकदर्शक बन कर नहीं बैठेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस वहां अपने $S-300$ मिसाइल सिस्टम और फाइटर जेट्स के जरिए अमेरिकी विमानों को चुनौती दे सकता है।
हमले के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने सरकारी टेलीविजन पर आकर देश को संबोधित किया। उन्होंने इसे अमेरिका की "साम्राज्यवादी कायराना हरकत" बताया। मादुरो ने कहा कि वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अपनी 'बोलिवेरियन नेशनल आर्म्ड फोर्सेस' (FANB) को युद्ध के लिए तैयार रहने और जवाबी कार्रवाई का आदेश दिया है। मादुरो का आरोप है कि अमेरिका उनके तेल भंडारों पर कब्जा करने के लिए लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को गिराना चाहता है।
इस हमले के बाद दुनिया दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है। रूस के विदेश मंत्रालय ने एक आपातकालीन बयान जारी करते हुए कहा कि वेनेजुएला पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। रूस ने चेतावनी दी है कि वह अपने मित्र देश को अकेला नहीं छोड़ेगा। वहीं, चीन ने भी संयम बरतने की अपील करते हुए अमेरिका को अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। बीजिंग का मानना है कि बाहरी दखलंदाजी से लैटिन अमेरिका में मानवीय संकट पैदा हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। यूएन महासचिव ने दोनों देशों से युद्ध रोकने की अपील की है, लेकिन ग्राउंड जीरो से आ रही खबरें कुछ और ही इशारा कर रही हैं। अमेरिका का तर्क है कि यह हमला वेनेजुएला में सक्रिय 'ड्रग कार्टेल्स' को नष्ट करने के लिए किया गया है, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके थे। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
"तेल और संप्रभुता पर हमला बर्दाश्त नहीं"चीन ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। बीजिंग के लिए वेनेजुएला सिर्फ एक सहयोगी नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा केंद्र है। चीन वेनेजुएला से भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। चीन ने कहा है कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी सैन्य दखल के सख्त खिलाफ है। चीनी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अमेरिका लैटिन अमेरिका को "नया युद्धक्षेत्र" न बनाए, अन्यथा इसके गंभीर आर्थिक परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने होंगे।
संयुक्त राष्ट्र में वेनेजुएला संकट को लेकर बुलाई गई आपातकालीन बैठक में माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा।
रूस और चीन: दोनों देशों ने अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के तेल टैंकरों को रोकने और सैन्य नाकेबंदी (Blockade) की निंदा की।
अमेरिका: अमेरिकी राजदूत ने पलटवार करते हुए कहा कि वेनेजुएला का 'मादुरो शासन' ड्रग तस्करी और आतंकवाद को पनाह दे रहा है, जो अमेरिकी सीमाओं के लिए खतरा है।
UN महासचिव: उन्होंने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है और कहा है कि मानवीय आधार पर किसी भी देश पर सैन्य हमला 'मानवाधिकारों का उल्लंघन' है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल दो देशों की जंग नहीं है। वेनेजुएला में रूस और चीन का भारी निवेश है। अगर अमेरिका यहाँ सत्ता परिवर्तन (Regime Change) करने में सफल रहता है, तो यह रूस और चीन के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका होगा। यही कारण है कि काराकास में गिरा एक भी अमेरिकी बम मॉस्को और बीजिंग में खतरे की घंटी बजा रहा है।
रूसी वायु रक्षा प्रणाली (The Iron Shield)वेनेजुएला के पास लैटिन अमेरिका का सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है:$S-300VM$ (Antey-2500): यह दुनिया के सबसे घातक मिसाइल सिस्टम में से एक है। यह 250 किमी की दूरी तक अमेरिकी फाइटर जेट्स और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। काराकास के पास इसकी तैनाती अमेरिकी वायुसेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
ये मध्यम और कम दूरी की मिसाइलें हैं, जो क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को नाकाम करने के लिए डिजाइन की गई हैं। आसमान के शिकारी: सुखोई जेट्सवेनेजुएला की वायुसेना के पास Sukhoi Su-30MK2 फाइटर जेट्स का बेड़ा है।यह विमान लंबी दूरी तक मार करने वाले रूसी मिसाइलों से लैस है।
अमेरिकी F-15 और F-16 जेट्स के मुकाबले यह हवा में अधिक फुर्तीला (Maneuverable) माना जाता है। रूस ने हाल के वर्षों में इन जेट्स के रखरखाव के लिए काराकास में एक ट्रेनिंग सेंटर भी खोला है।
चीन ने वेनेजुएला को आधुनिक रडार और निगरानी सिस्टम प्रदान किए हैं:
JYL-1 और JY-27 रडार: चीनी रडार तकनीक के कारण वेनेजुएला की सेना 'स्टील्थ' (अदृश्य) अमेरिकी विमानों को भी ट्रैक करने का दावा करती है।
VN-16 और VN-18: ये चीन में निर्मित उभयचर (Amphibious) टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां हैं, जो समुद्र के रास्ते होने वाले किसी भी अमेरिकी हमले (Invasion) को रोकने के लिए तैनात हैं।
सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि रणनीति भी महत्वपूर्ण है: रूसी 'वैगनर' (Wagner) ग्रुप की मौजूदगी: कई रिपोर्टों के अनुसार, वेनेजुएला में रूसी प्राइवेट मिलिट्री कांट्रैक्टर्स (PMC) मौजूद हैं, जो मादुरो की सुरक्षा और रणनीतिक ठिकानों की रखवाली करते हैं।
मिलिशिया बल: मादुरो ने लगभग 40 लाख नागरिकों (Milicia Nacional) को बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण दिया है। यदि अमेरिकी सेना जमीन पर उतरती है, तो उन्हें घने जंगलों और शहरों में भयंकर गुरिल्ला युद्ध का सामना करना पड़ सकता है।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने पूरे देश में 'आपातकाल' (State of External Commotion) की घोषणा कर दी है और सेना के साथ-साथ आम जनता को तत्काल 'सशस्त्र संघर्ष' और राष्ट्र रक्षा के लिए लामबंद होने का आदेश दिया है। वेनेजुएला ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करेगा और इस 'साम्राज्यवादी आक्रमण' को परास्त करने के लिए 'एकता, संघर्ष और जीत' के संकल्प के साथ डटा रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार तकनीकी रूप से अमेरिका की शक्ति अपार है, लेकिन वेनेजुएला के पास मौजूद $S-300$ जैसे हथियार इसे एक 'महंगा युद्ध' (Costly War) बना सकते हैं। रूस ने पहले ही संकेत दिया है कि वह अपने तकनीशियनों को वहां तैनात रखेगा, जिसका अर्थ है कि अमेरिकी मिसाइलें रूसी नागरिकों को भी निशाना बना सकती हैं, जिससे स्थिति 'तीसरे विश्व युद्ध' जैसी हो सकती है।