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जिस यूक्रेन के लिए भारत से उलझ गए ट्रंप, उसी ने दे दिया बड़ा झटका; अब पुतिन से क्या बोलेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति?

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें ट्रंप ने रूस के साथ क्षेत्रों की अदला-बदली का सुझाव दिया था। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अपनी जमीन कभी नहीं छोड़ेगा और बिना यूक्रेन की भागीदारी के कोई फैसला नहीं हो सकता है

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Aug 10, 2025
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- IANS)

जिस यूक्रेन के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत से उलझ गए, अब उसी ने अमेरिका को बड़ा झटका दे दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने ट्रंप के एक प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

दरअसल, ट्रंप ने शनिवार को व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं के कारण रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बैठक में देरी हुई है।

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उन्होंने आगे कहा कि बैठक के दौरान रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को रोकने के लिए दोनों देशों के बीच कुछ क्षेत्रों की अदला-बदली पर चर्चा की जाएगी।

ट्रंप के इसी बयान पर जेलेंस्की भड़क उठे। उन्होंने भी तुरंत प्रतिक्रिया दे डाली। शनिवार को उन्होंने कहा कि यूक्रेन जबरन कब्जा करने वालों को एक इंच भी जमीन नहीं देगा। वह रूस को उसकी आक्रामकता के लिए पुरस्कृत नहीं करने वाले हैं।

जेलेंस्की ने 15 अगस्त को होने वाली बैठक की आलोचना भी की

जेलेंस्की ने कहा कि युद्ध को रोकने का लक्ष्य हत्याओं पर विराम लगाना नहीं, बल्कि तुरंत एक वास्तविक और स्थायी शांति स्थापित करना है।

इसके अलावा, जेलेंस्की ने राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 15 अगस्त को अलास्का में होने वाली प्रस्तावित बैठक की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की भागीदारी के बिना लिए गए कोई भी निर्णय अमान्य हैं। वे कभी काम नहीं करेंगे।

चार साल से चल रहा युद्ध

बता दें कि उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब शीर्ष यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों ने इंग्लैंड के केंट में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ संघर्ष को समाप्त करने के कूटनीतिक उपायों पर चर्चा की, जिसे अब चार साल होने वाले हैं।

बैठक में यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, फ़िनलैंड और पोलैंड सहित प्रमुख यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि शामिल थे। जेलेंस्की ने चर्चाओं को 'रचनात्मक' बताया और पश्चिमी समर्थन जारी रहने की आशा व्यक्त की।

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