नेपाल में हिंसक प्रदर्शन को अमेरिका और चीन के झगड़े से भी जोड़कर देखा जा रहा है। साथ ही, इस प्रदर्शन के पीछे एक गैर सरकारी संगठन का नाम भी सामने आ रहा है।
Nepal Protest: नेपाल में सोमवार को सोशल मीडिया बैन, भ्रष्टाचार और असमानता के खिलाफ युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन सौ से अधिक लोग घायल हो गए। इस प्रदर्शन के पीछे हामी नेपाल नाम के एक गैर सरकारी संगठन का नाम सामने आ रहा है। इसके साथ ही, नेपाल में हिंसक प्रदर्शन का कनेक्शन चीन और अमेरिका से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
जानकारी सामने आ रही है कि हामी नेपाल ने इंस्टाग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर छात्रों को एकजुट किया। NGO ने सोशल मीडिया पर 'हाउ टू प्रोटेस्ट' वीडियो अपलोड किए। इसमें प्रदर्शन कैसे करना है, प्रदर्शन के दौरान क्या करना है। साथ ही, NGO ने जैन-जी को प्रदर्शन के दौरान स्कूल यूनिफॉर्म में आने की सलाह दी।
हामी नेपाल ने यूथ अगेंस्ट करप्शन नाम का बैनर तैयार किया था। इसके लिए नेपाल में कई जगह NGO ने प्रदर्शन करने के लिए अनुमति ली थी, लेकिन अब NGO के इस प्रदर्शन को सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन रूल्स का पालन नहीं करने वाले 27 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ एक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
नेपाल के अधिकारियों के मुताबकि यह NGO साल 2015 में रजिस्टर किया गया था। NGO का काम मुख्य रूप से बाढ़ व आपदा प्रभावित लोगों की मदद करना है। NGO ने फ्लड रेस्क्यू ट्रेनिंग और कई अन्य नागरिक परियोजनाओं के लिए नेपाल की सेना के साथ भी साझेदारी की है। इसके साथ ही, इस गैर सरकारी संस्था ने कई बार सामाजिक मुद्दों को भी उठाया। एनजीओ के 36 वर्षीय संस्थापक सुदान गुरुंग ने 8 सितंबर को विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी। NGO ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से कई स्लोगन भी शेयर किए।
नेपाल में इस हिंसक विरोध प्रदर्शन का कनेक्शन अमेरिका और चीन के साथ भी जोड़कर देखा जा रहा है। नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली कुछ दिन पहले चीन के दौरे पर गए थे। वह चीन के विक्ट्री डे परेड में भी शामिल हुए थे। इसके कुछ दिनों बाद ही नेपाल की सरकार ने 26 सोशल मीडिया ऐप्स को बैन कर दिया। ये सभी सोशल मीडिया ऐप्स अमेरिकी थीं, जबकि चीन का टिकटॉक व अन्य ऐप्स नेपाल में धड़ल्ले से चल रहा है।