-ऑस्ट्रेलिया के निकट फंस गई थी 480 पायलट व्हेल (480 pilot whales trapped near Australia), -चार दिन चले बचाव अभियान में 50-60 को ही बचाया जा सका-पानी ठंडा होने से बचाव कार्य में आई परेशानी
कैनबरा. ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी हिस्से में तस्मानिया तट के निकट चार दिन पहले फंसी 460 पायलट व्हेल में कम से कम 380 ने दम तोड़ दिया। 60 से अधिक बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद 50 मछलियों को बचाने में कामयाबी हासिल की है, जबकि कुछ को बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। पानी बहुत ठंडा होने की वजह से राहत कार्य में बाधा आ रही है। इसलिए बचावकर्मी शिफ्ट में काम कर रहे हैं। व्हेल मछलियां करीब 10 किलोमीटर के इलाके में फंसी हुई हैं। बताया जा रहा है कि मछलियों का ये विशाल समूह तैरते हुए तस्मानिया तट की ओर आया था, लेकिन उथले पानी में ये मछलियां फंस गई। सामूहिक रूप से मछलियों के तट पर फंसने की पहेली अभी तक सुलझाई नहीं जा सकी हैं। व्हेल और अन्य बड़ी मछलियां जब समुद्री तट पर आकर फंस जाती हैं, तो उसे ‘सिटेसियन स्ट्रैंडिंग’ या बीचिंग कहते हैं। आमतौर पर तटों पर फंसने के बाद ज्यादातर मछलियां मर जाती हैं।
ये कारण मानते हैं जीव विज्ञानी
1. सोनार ठीक से काम नहीं करता
जीव विज्ञानी इसके पीछे ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण या जियोमैग्नेटिक दुष्प्रभाव मानते हैं। इसके कारण मछलियों की सोनार प्रणाली ठीक से काम नहीं कर पाती, जो उन्हें दिशा ढूंढने में मदद करती है। कई बार जहाजों के सोनार की वजह से भी ये मछलियां रास्ता भटक जाती हैं।
2. एक थ्योरी ये भी
कई बार किसी परेशानी के चलते व्हेल जब तट पर आ जाती है तो दूसरी व्हेल को संकेत भेजती है। इन संकेतों को पाकर दूरी व्हेल भी वहां आ जाती हैं और फंसने लगती हैं। फंसने का अभिप्राय उथले पानी में आ जाना होता है।
पहली बार नहीं हुई ऐसी घटना
तस्मानिया पार्क एंड वाइल्डलाइफ सर्विस के क्षेत्रीय प्रबंधक निक डेका ने कहा कि तस्मानिया में समुद्र तट पर व्हेलों के फंसे होने की घटना कोई नई या असामान्य घटना नहीं है। आमतौर पर हर दो या तीन हफ्तों में एक बार तस्मानिया में डॉल्फिन और व्हेल के फंसे होने की घटना होती है, लेकिन इतने बड़े समूह में मछलियों के फंसने की घटना 10 साल बाद हुई है। इससे पहले ऐसी घटना 2009 में हुई थी। उस समय समुद्र तट पर 200 व्हेलों को फंसा हुआ देखा गया था। 2018 में भी ऐसी ही एक घटना में न्यूजीलैंड के तट पर करीब 100 पायलट व्हेलों की मौत हो गई थी।
ऐसी है पायलट व्हेल
पायलट व्हेल समुद्री डॉल्फिन की एक प्रजाति है जो 23 फीट तक लंबी होती है। इसका वजन 3 टन तक हो सकता है। ये व्हेल समूह में यात्रा करती हैं।