
फोटो में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई (सोर्स : ANI)
Iran-US War Update: मिडिल-ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच हालात अब और गंभीर होते दिख रहे हैं। ईरान ने साफ संकेत दे दिया है कि अब वह अमेरिका का कोई भी हमला बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के नौ-पॉइंट प्रस्ताव का जवाब देते हुए दो टूक मांग रखी है। इसमें नॉन-अग्रेसन यानी हमला न करने की पक्की गारंटी, आसपास के इलाकों से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी।
सेमी-ऑफिशियल एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट बताती है कि ईरान का यह रुख सिर्फ जवाब नहीं, बल्कि आगे की रणनीति का संकेत भी है। खास बात यह है कि इस पूरे प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने पर जोर दिया गया है, लेकिन शर्तों के साथ। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह तनाव कम होने की शुरुआत है या फिर टकराव और बढ़ने वाला है?
अमेरिका ने अपने 9-पॉइंट प्रस्ताव में 2 महीने के सीजफायर की बात कही थी, लेकिन ईरान चाहता है कि सभी मुद्दे 30 दिनों के अंदर सुलझाए जाएं और ध्यान सिर्फ युद्ध खत्म करने पर हो, न कि सीजफायर बढ़ाने पर।
ईरान ने इसके जवाब में अमेरिका को 14-पॉइंट का प्रस्ताव दिया है। इसमें कई बड़ी मांगें शामिल हैं- जैसे नेवल ब्लॉकेड हटाना, ईरान के फ्रीज किए गए पैसे वापस करना, नुकसान की भरपाई (कम्पेनसेशन) देना, सभी सैंक्शन हटाना और लेबनान समेत हर मोर्चे पर युद्ध खत्म करना।
इसके अलावा, होर्मुज के लिए एक नया सिस्टम बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। साथ ही ईरान ने अपने आसपास के इलाकों से अमेरिकी सेना हटाने और आगे कोई हमला न करने की गारंटी भी मांगी है।
फिलहाल, ईरान इन प्रस्तावों पर अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। वहीं, ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के मैनेजमेंट को बदलने के लिए 12-पॉइंट प्लान वाला नया बिल तैयार किया जा रहा है।
तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्लान में कहा गया है कि जायोनी शासन (इज़रायल) से जुड़े जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वहीं, जो देश युद्ध में शामिल हैं, उनके जहाजों को यहां से गुजरने के लिए पहले युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज को ईरान से लाइसेंस और परमिशन लेनी पड़ेगी।
ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने कहा कि यह कानून अंतरराष्ट्रीय नियमों और पड़ोसी देशों के अधिकारों का ध्यान रखते हुए बनाया जाएगा। लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान अपने कानूनी अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा, यहां जहाजों की आवाजाही पहले जैसी नहीं रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट का नया मैनेजमेंट ईरान के लिए उतना ही अहम है जितना तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण था। इसे उन्होंने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक पर देश की ताकत दिखाने वाला बड़ा कदम बताया।
वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान दिया कि अब अमेरिका के सामने दो ही रास्ते हैं- पहला या तो वह एक मुश्किल सैन्य कार्रवाई करे या फिर ईरान के साथ कोई सख्त समझौता करे। IRGC ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास फैसले लेने के विकल्प अब काफी सीमित हो गए हैं।
Updated on:
04 May 2026 12:22 am
Published on:
03 May 2026 11:21 pm
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