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कुदरत का कोहराम: साल 2026 की शुरुआत ही ‘एक्सट्रीम वेदर’ के नाम, WMO ने दी चेतावनी

WMO ने जनवरी 2026 को चरम मौसम का महीना घोषित किया है। रूस में 140 साल की रिकॉर्ड बर्फबारी, चिली में भीषण आग और अफ्रीका में बाढ़-जानें कैसे ग्लोबल वार्मिंग और पोलर जेट स्ट्रीम बदल रहे हैं दुनिया का मौसम। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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Updated: 31 Jan 2026, 3:19 AM IST
Extreme Weather
जनवरी 2026 'एक्सट्रीम मंथ' घोषित (Photo - WMO)

मौसम की नजर से साल 2026 का जनवरी दुनिया भर के लिए रिकार्ड गर्मी, भयानक ठंड, भारी बर्फबारी, बारिश व बाढ़ का महीना रहा है। मौसम के उथल-पुथल ने कई देशों के जनजीवन को प्रभावित कर दिया। विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने जनवरी को चरम मौसम का महीना करार दिया है, जिसमें दुनिया भर में रिकॉर्ड गर्मी, भयंकर ठंड, भारी बर्फबारी, जंगल की आग, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं एक साथ हुईं। ये सभी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी हैं। ग्लोबल वार्मिंग से मौसम पैटर्न बदल रहे हैं। पोलर जेट स्ट्रीम में वेवीनेस बढ़ी है, जिससे ठंडी हवा दक्षिण की ओर आ रही है।

संगठन की सेक्रेटरी-जनरल सेलेस्टे साउलो ने कहा कि हर साल मौसम से जुड़ी आपदाओं से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ रही है। लंबे समय से तापमान बढ़ने से ऐसे चरम मौसम ज्यादा बार और तीव्र हो रहे हैं। आईपीसीसी रिपोर्ट के मुताबिक 1950 से हीटवेव की फ्रीक्वेंसी और तीव्रता बढ़ी है। डब्ल्यूएमओ ने हाल ही पुष्टि की कि 2025 तीन सबसे गर्म सालों में से एक था और 2026 में भी यही ट्रेंड जारी है।

चरम गर्मी और जंगलों में लगी आग

जनवरी में गर्मी के रिकॉर्ड टूटे। ऑस्ट्रेलिया में दो हीटवेव आईं, जिससे खतरनाक आग के अलर्ट जारी हुए। चिली के बायोबियो और न्यूब्ले इलाकों में घातक जंगल की आग लगी। सैकड़ों घर खाक हुए और 21 मौतें हुईं। भारत में उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में भी जंगल की आग लगी।

चरम ठंड और बर्फबारी : रूस में 140 साल की रेकॉर्ड बर्फबारी

पोलर वोर्टेक्स कमजोर होने से आर्कटिक की ठंडी हवा मिड-लैटिट्यूड में आई, जिससे उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में ठंडी लहरें चलीं। कनाडा और यूएसए में बड़ा विंटर स्टॉर्म आया, जिसमें सैकड़ों मौतें हुईं। रूस के कामचटका प्रायद्वीप पर पहले दो हफ्तों में 2 मीटर से ज्यादा बर्फ गिरी, जो 1970 के बाद सबसे ज्यादा थी। रूस में 140 साल की रिकॉर्ड बर्फबारी दर्ज हुई। भारत में देर से बर्फबारी हुई, लेकिन मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस से अब हिमालय बर्फ से ढका हुआ है।

भारी बारिश और बाढ़ : लाखों लोग प्रभावित हुए

भारी बारिश व बाढ़ से दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। हफ्तों की बारिश से नदियां उफान पर आ गई और 6.5 लाख लोग प्रभावित हुए। इंडोनेशिया के वेस्ट जावा में 24 जनवरी को भारी बारिश से लैंडस्लाइड में 50 से ज्यादा मौतें हुईं। न्यूजीलैंड में ट्रॉपिकल स्टॉर्म से उत्तर द्वीप में रेकॉर्ड बारिश और बाढ़-भूस्खलन हुआ। उत्तर अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत और नेपाल में भारी बर्फबारी-बारिश से हिमस्खलन का खतरा बढ़ा। यूरोप में बैक-टू-बैक स्टॉर्म से आयरलैंड से स्पेन तक बाढ़ आई और तेज हवाएं चलीं।

Updated on:
31 Jan 2026, 3:19 AM IST
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