
हूती विद्रोहियों (Houthis) और यमन (Yemen) की सरकारी सेना के बीच जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, जिससे दोनों को ही नुकसान भी हो रहा है। दोनों का मकसद एक-दूसरे के ज़्यादा से ज़्यादा इलाकों पर कब्ज़ा करके अपना प्रभाव बढ़ाना है। आज एक बार फिर हूती विद्रोहियों ने यमन की सरकार द्वारा नियंत्रित ताइज़ प्रांत पर हमला किया, लेकिन इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली।
यमन की सेना ने जानकारी दी है उसने ताइज़ प्रांत में हूती विद्रोहियों के हमले को नाकाम कर दिया है। यह हमला प्रांत के अल-अकरुद मोर्चे पर किया गया था। यमन की सेना ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच जंग अब हमाह, अल-कुरैफ, रास अल-नक़िल और अल-कहफा सहित कई इलाकों में फैल चुकी है।
यमन की सेना ने दावा किया है कि हमाह, अल-कुरैफ, रास अल-नक़िल और अल-कहफा सहित कई इलाकों में चल रही जंग में कई हूती लड़ाके मारे गए हैं। वहीँ कई हूती लड़ाके घायल होकर भागने के लिए मजबूर हो गए। यमन की सेना ने यह भी बताया कि ताइज़ में कहलान और सब्र मोर्चों पर उन्होंने ज़मीनी स्तर पर आगे बढ़कर हूतियों के खिलाफ अपनी स्थिति मज़बूत की है।
यमन में चल रही जंग की वजह से खाने का संकट पैदा हो गया है, जिससे जनता को काफी परेशानी हो रही है। वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम - डब्ल्यूएफपी (World Food Programme - WFP) की रिपोर्ट के अनुसार यमन में तेज़ी से बढ़ रही जंग की वजह से 8 लाख लोगों तक खाद्य सहायता नहीं पहुंच पा रही है। जंग के बदलते मोर्चों, बंद सड़कों और सुरक्षा की बिगड़ती स्थितियों की वजह से कई अहम इलाकों तक खाद्य सहायता का पहुंचना बहुत मुश्किल हो गया है। जंग का सबसे ज़्यादा असर ताइज़ शहर पर पड़ा है। यह ताइज़ प्रांत की राजधानी होने के साथ ही देश का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और जंग से सबसे ज़्यादा प्रभावित शहर है। ताइज़ में जंग, लगातार हो रहे हमलों और सड़कों के बंद होने की आशंका के कारण हज़ारों विस्थापित परिवारों वाले इलाकों तक पहुंचना लगभग नामुमकिन सा हो गया है, जिससे इन परिवारों को काफी परेशानी हो रही है। वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम के अनुसार अकेले ताइज़ में ही 6 लाख से ज़्यादा लोग खाद्य सहायता से वंचित हो गए हैं, जिनमें लगभग 2 लाख महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा यमन के पश्चिमी तट पर भी हाल ही में मदद पहुंचाने में रुकावटें देखने को मिली हैं।