
यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों पक्षों की तरफ से एक-दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं। सऊदी अरब समर्थित यमन की सरकारी सेना भी हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। इसी बीच यमन की सेना को हूतियों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी मिली है।
यमन की सरकारी सेना ने देश के लाहिज (Lahij) प्रांत में माउंट नुमान (Mount Numan) पर कब्ज़ा कर लिया है। यमन की सेना ने माउंट नुमान की चोटी के साथ ही दार अल-काफिर (Dar al-Kafir) इलाके पर भी कब्ज़ा करने का ऐलान किया है।
यमन की सरकारी सेना ने बयान जारी करते हुए बताया कि उनकी टुकड़ी ने हूतियों इस कार्रवाई को बेहद ही सावधानी से अंजाम दिया और हूतियों को इलाके से खदेड़ दिया। इस कार्रवाई की शुरुआत नियंत्रित तौर पर हुई, जिससे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया। इसके बाद सुबह के समय उन ठिकानों की ओर आगे बढ़ा गया और अचानक हमला कर दिया गया। हूती विद्रोही इस हमले के लिए तैयार नहीं थे। ऐसे में उन्हें अपनी जान बचाकर इलाके को छोड़कर भागना पड़ा, जिसके बाद यमन की सेना ने उस पर कब्ज़ा कर लिया। यमन की सेना के साथ हुई मुठभेड़ में कुछ हूती विद्रोही हताहत भी हुए। ऐसे में बाकी बचे हुए हूती अपने हताहत साथियों के साथ-साथ हथियार और गोला-बारूद भी वहीं छोड़ गए।
माउंट नुमान रणनीतिक नज़रिए से बेहद अहम है। माउंट नुमान की चोटी से दक्षिणी लाहिज प्रांत के अल-वाज़ियाह और अल-मदारिबा ज़िलों पर नज़र रखी जा सकती है। इसकी ऊंचाई के कारण इस पर कंट्रोल करने वाले पक्ष को काफी फायदा मिलता है। निगरानी के साथ ही हथियारों, गोला-बारूद की सप्लाई में भी सुविधा मिलती है। यह बाब अल-मंदेब स्ट्रेट (Bab el-Mandeb Strait) के पास स्थित तटीय क्षेत्रों तक पहुंच को भी प्रभावित करता है।
यमन में संघर्ष 2014 के आखिर में तब शुरू हुआ जब हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। हूतियों को ईरान (Iran) का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ यमन की सेना को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है।