
International Support Yemen: यमन में लंबे समय से थमी जंग एक बार फिर बड़े क्षेत्रीय संकट की ओर बढ़ती दिख रही है। हूती लड़ाकों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और लाल सागर के आसपास अस्थिरता के बीच यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने बाहरी दुनिया से निर्णायक सहयोग मांगा है। विदेश मंत्री अफरा अल-जुबा का कहना है कि यह लड़ाई अब केवल यमन की आंतरिक समस्या नहीं रही, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय हितों से भी जुड़ गई है।
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती आंदोलन के खिलाफ अपना रुख और कड़ा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से राजनीतिक, मानवीय और अन्य जरूरी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। विदेश मंत्री अफरा अल-जुबा ने कहा है कि देश में स्थिरता कायम करना केवल यमनी जनता के हित में नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है।
अल-जुबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि सरकार यमनी जनता, राज्य और राष्ट्रीय संस्थाओं के समर्थन का आह्वान करती है। उनके मुताबिक, संघर्ष को शांत करने और राजनीतिक समाधान की कोशिशों के बावजूद हालात फिर गंभीर होते जा रहे हैं। उन्होंने हूती आंदोलन पर हथियारों के बल पर लोगों की इच्छा को दबाने का आरोप लगाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
यह अपील ऐसे समय सामने आई है जब यमन में हालिया सैन्य तनाव तेजी से बढ़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के उद्देश्य से बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। संघर्ष का एक अहम केंद्र ताइज और लाल सागर से जुड़े रणनीतिक क्षेत्र बने हुए हैं।
यमन की चिंता का एक बड़ा कारण बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य भी है। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी हाल के महीनों में इस क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
अल-जुबा ने कहा कि हूतियों से जुड़ी गतिविधियों का असर यमन की सीमाओं से बाहर तक पहुंच चुका है। यमनी विदेश मंत्रालय पहले भी लाल सागर में नौवहन, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर संभावित असर को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग कर चुका है।
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र लगातार सैन्य समाधान के साथ-साथ यमनी नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया को जरूरी बताता रहा है। यूएन अधिकारियों के अनुसार, वर्षों से चले आ रहे संघर्ष का स्थायी समाधान बातचीत और व्यापक राजनीतिक समझौते के जरिए ही संभव है। DPPA
यमन में बढ़ती हिंसा का मानवीय असर भी गहरा है। हालिया संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है और भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ा है।