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आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की भारत में ट्विटर छंटनी की निंदा, यूएन में भी दिखी चिंता

एलन मस्क का ट्विटर से एकमुश्त हजारों कर्मियों को निकाल दिए जाने से दुनिया भर में इसकी निंदा हो रही है। छंटनी के मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच चुका है और इसने भी इस पर चिंता जताई है।वहीं, भारत केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत में अपने कर्मचारियों को बर्खास्त करने के लिए एलन मस्क द्वारा संचालित ट्विटर के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें बदलाव के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए था।

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भारत केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की ट्विटर की छंटनी की आलोचना

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत में अपने कर्मचारियों को बर्खास्त करने के लिए एलन मस्क द्वारा संचालित ट्विटर के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें बदलाव के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए था। बता दें, मस्क ने वैश्विक स्तर पर ट्विटर के लगभग आधे कर्मचारियों को निकाल दिया, जिसमें भारत में लगभग 150-180 कर्मचारी शामिल थे, जिसके बाद वैष्णव की प्रतिक्रिया आई है।

कर्मचारियों को एक मेल लिखकर किया गया बर्खास्त

वैष्णव ने कहा, जिस तरह से ट्विटर ने भारत में कर्मचारियों को बर्खास्त किया है, हम उसकी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को बदलाव के लिए उचित समय देना चाहिए था। भारत में छंटनी सेल्स से लेकर मार्केटिंग तक, कंटेंट क्यूरेशन से लेकर कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस तक सभी विभागों में की गई है। पिछले हफ्ते ही भारत में ट्विटर के कर्मचारियों ने अपने आधिकारिक ईमेल और आंतरिक स्लैक और ग्रुप चैट से उनको बाहर कर दिया।

बचे हुए कर्मियों को भी हटाए जाने का डर

जो लोग अभी भी ट्विटर इंडिया के साथ हैं, वे अगले दौर में अपनी नौकरी खोने के बारे में लगातार डर में जी रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि मस्क के इरादों को ध्यान में रखते हुए ऐसा जल्द ही होगा। मस्क ने कहा कि ट्विटर के आधे कर्मचारियों को बेरहमी से बर्खास्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि कंपनी को प्रतिदिन 40 लाख डॉलर से अधिक का नुकसान हो रहा था। उन्होंने कहा, बाहर निकलने वाले सभी लोगों को 3 महीने के सेपरेशन पैकेज की पेशकश की गई है, जो कानूनी रूप से आवश्यकता से 50 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्विटर ने राजस्व में भारी गिरावट देखी है क्योंकि एक्टिविस्ट ग्रुप अपने विज्ञापनदाताओं पर अनुचित दबाव डाल रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र भी पहुंचा छंटनी का मामला

ट्विटर द्वारा छंटनी का मामला संयुक्त राष्ट्र भी पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने शनिवार को ट्विटर इंक के नए मालिक एलन मस्क को लिखे एक खुले खत में उनसे ये सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया कि मानवाधिकार ट्विटर के प्रबंधन के लिए केंद्रीय मूल्य के तौर पर कायम रहेंगे। बता दें, ट्विटर ने शुक्रवार को अपने आधे कर्मचारियों की छंटनी की थी और सोशल मीडिया कंपनी के कर्मचारियों के ट्वीट में कहा गया था कि मानवाधिकारों के लिए जिम्मेदार टीम भी इससे प्रभावित हुए लोगों में शामिल थी। टर्क ने कहा कि ये एक ऐसा कदम है जिसे उत्साहजनक शुरुआत नहीं कहा जा सकता है।

ट्विटर वैश्विक क्रांति का हिस्सा: यूएन प्रतिनिधि

वोल्कर टर्क ने अपने पत्र में कहा कि ट्विटर एक वैश्विक क्रांति का हिस्सा है, जिसने हमारे संवाद करने के तरीके को बदल दिया है। लेकिन मैं हमारे डिजिटल पब्लिक स्क्वायर और इसमें ट्विटर की भूमिका के बारे में चिंता और आशंका के साथ लिख रहा हूं। उन्होंने कहा कि सभी कंपनियों की तरह ट्विटर को भी अपने प्लेटफॉर्म से जुड़े नुकसानों को समझने और उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। हमारे साझा मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए सोशल प्लेटफॉर्म को उपयोग और विकास के लिए सीमा रेखा तय करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा कि ‘संक्षेप में, मैं आपसे यह सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं कि आपके नेतृत्व में ट्विटर के प्रबंधन के लिए मानवाधिकार केंद्रीय हैं।’

अराजकता से भरा रहा हफ्ता
गौरतलब है कि शुक्रवार को ट्विटर में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क के स्वामित्व में ट्विटर के भविष्य के बारे में अनिश्चितता पैदा कर दी है। एलन मस्क के ट्विटर का मालिक बनने के बाद कंपनी का एक हफ्ता अराजकता से भरा रहा है। मस्क के ट्विटर के सीईओ सहित कई टॉप मैनेजमेंट की एक झटके में छुट्टी करने के बाद ट्विटर के राजस्व में भारी गिरावट देखी जा रही है। राजस्व बढ़ाने के लिए ट्विटर ने हर महीने 8 डॉलर के शुल्क के साथ ‘ट्विटर ब्लू टिक’ सेवा को शुरू करने की घोषणा की है।

Updated on:
07 Nov 2022 03:28 pm
Published on:
07 Nov 2022 02:01 pm
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