
Baisakhi in golden temple
अमृतसर। बैसाखी का पर्व और फसल कटाई की तैयारी। कैसे कोई अपनी आस्था छोड़ सकता है, फिर चाहे वो कोरोना जैसी घातक बीमारी का शिकार ही क्यों न होता हो। सोमवार का दिन बैसाखी व खालसा पंथ की स्थापना दिवस का पर्व होता है। सिख श्रद्धालु कैसे अपने आपको गुरु घर से दूर रख सकते थे। टूट गई बंदिशें। काफूर हो गया मन से कोरोनावायरस का भय। फिर से कोरोनावायरस पर भारी पड़ गई आस्था की जंग। पहुंच गए श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह बैसाखी पर घरों में रहकर कोविड-19 के खिलाफ अरदास की अपील की थी। इसका भी असर हुआ।
माथा टेका और लंगर छका
बैसाखी वाले दिन अमृतसर दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) में आने के लिए मना किया गया था। अकाल तख्त के जत्थेदार व एसजीपीसी अध्यक्ष ने घर में रह कर बैसाखी मनाने को कहा था। दरबार साहिब परिसर में दूर दूर से सैकड़ों श्रद्धालुओ की भीड़ उमड़ पड़ी। बिना सोशल डिस्टेंस का पालन किए माथा टेकने लगे। साथ ही श्रद्धालु सरोवर में स्नान भी करते दिखाई दिए। पंगत में बैठ कर लंगर भी छकते दिखाई दिए।
क्या कहते हैं श्रद्धालु
इस मोके पर बोलते हुए एक श्रद्धालु श्रवण सिंह ने कहा - बैसाखी का दिन है। गुरू के दर्शन करके ही फसल की कटाई शुरू करनी है। दरबार साहिब में आने से कोई कोरोना नहीं रोक सकता है। 90 साल दंपति ने माथा टेकने जाते हुए कहा - उम्र के आखिरी पड़ाव में है। कल का दिन हो न हो, आज दर्शन हो जाएं तो जिंदगी सफल है।
Published on:
13 Apr 2020 09:12 pm
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