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बदले मौसम के मिजाज; आंधी तूफान के साथ झमाझम बारिश, पेड़ हुए धराशायी

बदले मौसम के मिजाज; आंधी तूफान के साथ झमाझम बारिश, पेड़ हुए धराशायी

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बदले मौसम के मिजाज; आंधी तूफान के साथ झमाझम बारिश, पेड़ हुए धराशायी

तेज हवाओं में कच्चे घरो के छप्पर उड़े
कोतमा। नौतपा की गर्मी से बेहाल जनजीवन तथा छठवें दिन बदले मौसम के मिजाज में गुरूवार ३१ मई की दोपहर जिले के जमुना कोतमा क्षेत्र में तेज आंधी-तूफान ने जमकर कहर बरपाया। दोपहर के समय तेज धूल भरी आंधी के बाद आधे घंटे तक झमाझम बारिश हुई। जिसमें जगह जगह पेड़ों की डालियां टूटकर सडक़ों पर आ गिरा। वहीं कुछ स्थानों पर पेड़ जड़ से उखड़ गए। जबकि ग्रामीण इलाको में बने कच्चे मकानों व झोपडिय़ों के छप्पर भी तेज हवाओं में इधर-उधर उड़ गई। हालांकि इस दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं घटी। लेकिन मौसम के बदले मिजाज तथा बारिश के साथ चली हवाओं में मौसम खुशनुमा हो गया। प्रचंड धूप से परेशान लोगों को कुछ राहत मिली। बारिश के कारण उमस का भी सामना करना पडा। लेकिन तापमान में आए गिरावट से लोगो ने राहत की सांस ली। नगर सहित कोयलांचल क्षेत्र के जमुना, बदरा, भालूमाडा सहित ग्रामीण क्षेत्रो में तेज हवा के कारण जहां आम के फलों को नुकसान पहुंचा। वहीं बिजली के खम्भों के पेड़ की चपेट में धराशायी होने पर जनजीवन भी प्रभावित हुई। कोतमा में बिजली के पोल भी गिरने के कारण 2 घंटे तक बिजली भी बंद रही। जबकि भालूमाड़ा और बदरा में भी तेज तूफान में कई पेड़ गिर गए। जिसके कारण यातायात बाधित हुआ। कई बिजली के खंभे व तार टूटने से क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई।
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हर्री गांव में पानी के लिए बेहाल १ हजार की आबादी, प्रशासन के निर्देश के बाद भी विभाग की अनेदखी बरकरार
कोतमा। गर्मी शुरु होने के पूर्व ही प्रशासन के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था सुचारू रुप से संचालित करने के संभांगायुक्त एंव जिला कलेक्टर निर्र्देश के बाद भी कोतमा के हर्री गांव में पानी के लिए ग्रामीण बेहाल हैं। विभागीय लापरवाही में हर्री गांव के हजार परिवार जल सकंट की समस्याओं से जूझ रहे हैं। गांव में लगे नलजल योजना आज तक शुरु नहीं हो सकी। गांव के वार्ड 16,17,18 एंव 19 में आज भी लोग पीने के पानी के आसपास के गांवों की रूख कर रहे हैं। गांव के पूर्व उपसरंपच कामता उपाध्याय ने बताया कि गांव में लगे 7 में से 3 हैंडपंपों से हवा निकल रही है। वहीं वाटर लेबल नीचे जाने के कारण लाल पानी निकल रहा है। पूर्व में पानी की समस्या को लेकर सीएम हेल्प लाईन में भी शिकायत किए गए थे, बावजूद कोई सुधार नहीं हो सका है। साथ ही गर्मी के शुरुआत से ही ग्रामीणों द्वारा लगातार पीएचई, जनपद सहित जिला कार्यालय के चक्कर काटने के बाद भी गांव की1 हजार की आबादी पानी के लिए मोहताज है।