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चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अभाव में अटका 75 लाख की लगात से बनने वाली पेडियाट्रिक्स वार्ड, सालभर बाद भी नहीं हो सका संचालन

चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अभाव में अटका 75 लाख की लगात से बनने वाली पेडियाट्रिक्स वार्ड, सालभर बाद भी नहीं हो सका संचालन

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In the absence of a child specialist, the pediatric ward made of a sta

चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अभाव में अटका 75 लाख की लगात से बनने वाली पेडियाट्रिक्स वार्ड, सालभर बाद भी नहीं हो सका संचालन

0 से 5 वर्ष तक गम्भीर बच्चे हो रहे अन्य जगह के लिए रेफर
अनूपपुर। जिला अस्पताल में गम्भीर हालत में उपचार के लिए भर्ती होने वाले बच्चों की मृत्युदर को कम करने के उद्देश्य से एसएनसीयू के साथ अतिरिक्त ६ बिस्तरों वाली आधुनिक पीआईसीयू वार्ड योजना विशेषज्ञों के अभाव में अधूरी रह गई है। चाइल्ड विशेषज्ञों के अभाव में ७५ लाख की लागत से बनने वाली पेडियाट्रिक्स वार्ड का संचालन सालभर बाद भी नहीं हो सका। पेडियाट्रिक्स वार्ड लाईफ सपोर्ट की आधुनिक संसाधनों से लैस बिस्तर तथा आसपास उपकरणों से बनी होती, जो गम्भीर बीमार नौनिहालों के लिए जीवन वरदान साबित होता। वर्तमान में यह वार्ड उपकरण सहित बिस्तर से तैयार है, लेकिन डॉक्टरों के अभाव के साथ मशीनों का इस्टोलाइजेशन नहीं होने के कारण लाखों के मशीन धूल फांक रहे हैं। बताया जाता है कि पीआईसीयू वार्ड में गम्भीर रूप से बीमार बच्चे को प्राथमिक चेकआउट के उपरांत भर्ती किया जाता जहां वेन्टीलेटर सपोर्ट के साथ ऑक्सीजन सहित अन्य जीवन रक्षक दवाईयां और प्रशिक्षित डॉक्टर उपलब्ध रहते। अस्पताल सूत्रों का मानना है कि इस व्यवस्था में बच्चों को अधिक से अधिक सुरक्षित रखने में सफलता मिलेती। जबकि एसएनसीय वार्ड में सिर्फ नवजात शिशुओं को ही माहभर रखने की सुविधा होती है। लेकिन आधुनिक तकनीक में स्थापित होने वाली पैडयाट्रिस्क इन्सटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू)में ० से ५ वर्ष के बच्चों को रखकर जबतक उसका जीवन सामान्य प्रक्रियाओं के तहत नहीं स्टेबल हो जाता, अन्य वार्ड में नहीं शिफ्त किया जा सकेगा। यानि बच्चे की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी वार्ड की होती। पीआईसीयू वार्ड मे मिरगी दौरा, नीमोनिया, दिल में छेद, सांस लेने की समस्या सहित अन्य गम्भीर संक्रमण में प्रभावित बच्चे को भर्ती किया जाना है। वार्ड में २ वार्मअप मशीन तथा ४ सामान्य बिस्तर वाली सुविधा रहेगी। जिसे डॉक्टरों व स्टाफ नर्स की कमी पर फिलहाल दो चरणों में विकसित किया जाना प्रस्तावित था। इसमें प्रथम चरण में इसी पीआईसीयू वार्ड को एचडीयू वार्ड (हाई डिपेन्डेंसी यूनिट)के रूप में संचालित होगी, जिसे दो डॉक्टर और दो स्टाफ नर्स सम्भालेंगे। जबकि शासन स्तर पर डॉक्टरों व स्टाफ नर्स की प्रस्तावित संख्या उपलब्ध होती है तो इसी वार्ड को पीआईकेकेयू के रूप में संचालित किया जाता। पीक्कू वार्ड के लिए अस्पताल प्रशासन ने ४ डॉक्टर और १२ से अधिक नर्स स्टाफ का प्रस्ताव शासन को भेजा है। जिसमें फिलहाल जिला अस्पताल में सिविल सर्जन लेकर चार चाइल्ड विशेषज्ञ हैं, जिसमें दो ही एसएनसीयू के लिए उपलब्ध हो पाते हैं। इनमें किसी की अनुपस्थिति में सिविल सर्जन को ही आखिरी मोर्चा सम्भालना पड़ता है।
बॉक्स: नौनिहालों को मिलता जीवनदान
विदित हो कि कुपोषण के कारण अनूपपुर जिले में नवजातो की मौत के आंकड़ों सहित अतिकुपोषित बच्चों की तादाद भी अधिक है। वहीं प्रदेश की सूची में अनूपपुर जिले में सर्वाधिक(तीसरे स्थान) पर नवजातों की मौत के आंकड़े शामिल हैं। अमूनन प्रतिमाह एसएनसीयू वार्ड में भर्ती होने वाले ४०-४५ प्रतिशत नवजातों की मौत हो जाती है। इसका मुख्य कारण एसएनसीयू में उपलब्ध लाईफ सपोर्ट सिस्टम की अपर्याप्ता है। यहीं कारण है कि एसएनसीयू में भर्ती बच्चों में आधे से अधिक बच्चे की मौत हो जाती। यहीं नहीं बढ़ते उम्र के साथ आने वाली संक्रमण प्रकरणों पर गम्भीरता दिखाते हुए शासन ने पेडियाट्रिक्स इन्टेंसिव केयर यूनिट स्थापित करने के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन जमीनी धरातल पर योजना शोपीस बनकर रही गई है।
वर्सन:
पेडियाट्रिक्स वार्ड के लिए फिर से शुरूआत की गई है, शिशु विशेषज्ञों की कमी के कारण इसके संचालन में विलम्बता हो रही है। मशीनों का इस्टॉलेशन सहित वार्ड की फीनिसिंग कार्य शेष है।
डॉ. एसआर परस्ते, सिविल सर्जन जिला अस्पताल अनूपपुर।