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नगरीय प्रशासक की लापरवाही: बिना दुकान हैंडओवर लिए नपा ने जारी कर दी टेंडर, पैसे भुगतान बिना ठेकेदार ने हैंडओवर करने से कर दी मनाही

नगरीय प्रशासक की लापरवाही: बिना दुकान हैंडओवर लिए नपा ने जारी कर दी टेंडर, पैसे भुगतान बिना ठेकेदार ने हैंडओवर करने से कर दी मनाही

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Neutrality of the City Administrator: Napa issued the tender for the s

नगरीय प्रशासक की लापरवाही: बिना दुकान हैंडओवर लिए नपा ने जारी कर दी टेंडर, पैसे भुगतान बिना ठेकेदार ने हैंडओवर करने कर से दी मनाही

20 लाख की लगात से बनाए गए 6 दुकान पैसे भुगतान में निर्माण के दो साल बाद भी हंै वीरान
अनूपपुर। नर्मदा संरक्षा व अमरकंटक विकास के नाम पर शासकीय राशियों के दुरूपयोग को लेकर हमेशा चर्चाओं में बने रहने वाले नगरपरिषद अमरकंटक एक बार फिर अपनी कारगुजारियों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। जहां नगरपरिषद प्रशासक ने नगरीय क्षेत्र के वार्ड क्रमंाक ११ पं. दीनदयाल उपाध्याय चौराहा के पास लगभग २० लाख ७५ हजार से बनाए गए ६ दुकानों को ठेकेदार से हैंडओवर की प्रक्रिया अपनाए, टेंडर जारी कर दिए है। इसके लिए नगरीय प्रशासक ने नियमों को भी दरकिनार दिया, वहीं ठेकेदार ने अपनी ७ लाख से अधिक शेष राशियां के बिना भुगतान लिए नगरपरिषद को हैंडओवर करने की प्रक्रिया से मनाही कर दी है। जिसके उपरांत अब नगरपरिषद प्रशासक के आंखों की नींद ***** हो गई है। नप सूत्रों के अनुसार २ अगस्त २०१८ को नगरपरिषद अमरकंटक द्वारा जारी किए गए टेंडर की प्रक्रिया १४ अगस्त को खोली जाएगी, जहां दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लेकिन निवेशकों को आंवटित होने वाले दुकानों को नगर परिषद बिना हैंडओवर लिए कैसे उपलब्ध करा पाएंगे। बताया जाता है कि नगरपरिषद द्वारा बनवाए गए दुकान अपने निर्माण के दो साल से पैसे भुगतान और हैंडओवर की प्रक्रिया में वीरान पड़े हैं, जहां पैसे के अभाव में दुकानों की नीलामी नहीं कराई जा सकी। ठेकेदार का कहना है कि जबतक नगरपरिषद द्वारा हमारी शेष ७.५० लाख रूपए नहीं दे देती, हम दुकानों को नगरपरिषद को हैंडओवर नहीं करेंगे। बताया जाता कि नगरपरिषद अमरकंटक में नगरवासियों को सस्ती दर दुकान उपलब्ध कराने, अमरकंटक में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वर्ष २०१४-१५ के दौरान पं. दीनदयाल उपाध्याय चौराहा वैतरणी पुल के पास २०.७५ लाख की लागत से ६ दुकानों का निर्माण कार्य आरम्भ करवाया था। जहां डेढ वर्ष की समयावधि में ठेकेदार ने ६ दुकानों का निर्माण कार्य वर्ष २०१६ में पूर्ण कर लिया। इस दौरान नगरपरिषद ने दुकान निर्माण के दौरान ठेकेदार को १३.२५ लाख के भुगतान किए, शेष राशियां के जल्द भुगतान का आश्वासन दिया। लेकिन वर्ष २०१६ के दौरान पूर्ण निर्मित हुए दुकान पैसे के इंतजार में दो सालों तक ठेकेदार के कब्जे में ही रह गई। वहीं पैसे के भुगतान के अभाव में ठेकेदार ने उसे नगरपरिषद को नहीं सौंपा। जिसके उपरांत पुन: नगरपरिषद को इन ६ दुकानों की याद आई और आनन फानन में नगरीय प्रशासक ने २ अगस्त को टेंडर की प्रक्रिया जारी कर दुकान आवंटन के लिए टेंडर जारी कर दिए।
नियमानुसार नगरीय प्रशासक को ठेकेदार द्वारा बनाए गए दुकानों का प्राक्कलन के अनुसार मुआयना कर उसे हैंडओवर कर फिर टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण करनी चाहिए थी। लेकिन यहां सीएमओ ने ठेकेदार से बिना हैंडओवर की प्रक्रिया पूर्ण कराए टेंडर जारी कर दिया। इस सम्बंध में न तो इंजीनियर ने निर्माण कार्यो का मूल्यांकन किया और ना ही प्रशासन ने बिना हैंडओवर लिए शासकीय स्तर पर टेंडर जारी करने की प्रक्रिया में हस्ताक्षेप किया।
बॉक्स: एक ही पैसे में ठेकेदार और कर्मचारियों के भुगतान
बताया जाता है कि नगरपरिषद अमरकंटक में सैकड़ा कर्मचारियों को पिछले पांच माह से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। जहां हाल के दिनों में कर्मचारियों द्वारा कलेक्टर व कमिश्नर से शिकायत की चेतावनी पर सीएमओ ने १४ अगस्त की तिथि निर्धारित करते हुए टेंडर में आने वाली राशि से कर्मचारियों के भुगतान कराने का आश्वासन देकर १४ अगस्त तक की मोहल्लत ली है। वहीं दुकान निर्माण करने वाले ठेकेदार के ७.५० लाख के भुगतान में भी सीएमओ ने ठेकेदार को नीलामी में आने वाले पैसे से ही भुगतान कर दुकानों को अपने कब्जे में लेने का आश्वासन दिया है।
वर्सन:
ठेकेदार के पैसे देने इनके पास पैसे क्यों नहीं है, कर्मचारियों को पांच माह से भुगतान क्यों नहीं और अबतक इन्होंने हैंडओवर की प्रक्रिया पूर्ण नहीं करते हुए टेंडर जारी किया है तो मैं तत्काल मामले में सीएमओ से बात करती हूं।
अनुग्रह पी, कलेक्टर अनूपपुर।