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जिला अस्पताल की ओपीडी पर्ची में संबंधित डॉक्टर का नाम नहीं होने से भटक रहे मरीज

अनूपपुर. जिला चिकित्सालय में मरीजों को हो रही असुविधा को देखते हुए कलेक्टर ने ओपीडी पर्ची में मरीज के रोग से संबंधित चिकित्सक का नाम दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद इस मामले पर अब तक चिकित्सालय प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इस कारण आज भी मरीज ओपीडी पर्ची प्राप्त […]

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अनूपपुर. जिला चिकित्सालय में मरीजों को हो रही असुविधा को देखते हुए कलेक्टर ने ओपीडी पर्ची में मरीज के रोग से संबंधित चिकित्सक का नाम दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद इस मामले पर अब तक चिकित्सालय प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इस कारण आज भी मरीज ओपीडी पर्ची प्राप्त करने के बाद संबंधित चिकित्सक का पता लगाते हुए भटकते रहते हैं। चिकित्सालय प्रबंधन की लापरवाही के कारण जहां एक ओर कलेक्टर के निर्देश का पालन नहीं हो रहा है तो दूसरी ओर मरीज इसकी वजह से परेशान हो रहे हैं।

भटक रहा हूं, कोई नहीं दे रहा जानकारी

कोदैली निवासी संतोष पटेल ने बताया कि शरीर में फुंसी हो जाने की समस्या से वह परेशान है और इसके इलाज के लिए गांव से जिला चिकित्सालय आए हुए हैं। ओपीडी पर्ची लेने के बाद कोई यह नहीं बता रहा है कि किसी चिकित्सक से मिलना है। पर्ची लेकर स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय से कई बार पूछने के बाद भी संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक की जानकारी नहीं मिल पाई।

बाहर बोर्ड में विशेषज्ञ का नाम भी नहीं

ग्राम मंटूलिया से उपचार के लिए जिला चिकित्सालय पहुंचे आकाश कुमार पटेल ने बताया कि बाइक से गिर जाने के कारण एक हाथ में काफी दर्द है जिसे दिखाने के लिए वह यहां आए हुए हैं। ओपीडी पर्ची काटने के समय वहां मौजूद लोगों से पूछा लेकिन किसी ने नहीं बताया कि किस डॉक्टर को दिखाएं। चिकित्सालय में पहुंचने पर डॉक्टर के कमरे में ना तो उनके नाम का बोर्ड और ना ही वह किस रोग के विशेषज्ञ हैं यह जानकारी दर्ज है। जिसके कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

12 बजे के बाद से नहीं मिले चिकित्सक

खोडरी निवासी श्याम बाई लगभग 40 किमी दूर से कंधे में परेशानी को लेकर के इलाज के लिए आई थी। उन्होंने बताया कि 12 बजे से चिकित्सालय में है लेकिन यहां हड्डी रोग से संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। ओपीडी का निर्धारित समय होने के बावजूद चिकित्सक अपने केबिन में नहीं रहते और अपने निजी चिकित्सालय में सेवाएं देने के लिए चले जाते हैं जहां 300 से 400 रुपए की फीस देने के बाद मरीज को यह देखते हैं। प्रभारी मंत्री के भ्रमण के दौरान भी अस्थि रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं थे जिसके बाद इन्हें नोटिस जारी किया गया था लेकिन आज भी इनका यही रवैया है।