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सूर्यदेव हुए उत्तरायण: मकरसंक्रांति पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, मंदिरों में किया विशेष पूजन

अमरकंटक सहित जिलेभर में जगह जगह आयोजित हुआ मेला उत्सव, दो दिन तक मनेगा संक्रांति उत्सव

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Surya Deo Uttarayan: On the Makar Sankrant, devotees plunge the temp,

सूर्यदेव हुए उत्तरायण: मकरसंक्रांत पर श्रद्धालुओं ने अस्था की लगाई डुबकी, सूर्य को तिल-गुड अर्पणकर मंदिरों में किया विशेष पूजन

अनूपपुर। नई फसल की कटाई तथा सूर्यदेव के दक्षिणायन से उत्तरायण की पौराणिक मान्यताओं में 14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे श्रद्धा व हर्षोउल्लास के आरम्भ हुआ। इस वर्ष राशियों में परिवर्तन 14 जनवरी की देर रात हो रहा है, इसलिए मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। जिले की पवित्रनगरी अमरकंटक के नर्मदा सहित जिला मुख्यालय के सोन-तिपान नदी संगम पर श्रद्धालुओं ने नदियों में आस्था की डुबकी लगाई। जबकि राजेन्द्रग्राम, कोतमा, जैतहरी, राजनगर, बिजुरी सहित अन्य क्षेत्रों से गुजरती नर्मदा, सोन, जुहिला, तिपान, केवई सहित अन्य नदियों के नदीघाटों पर लोगों ने स्नानकर इष्टदेवों की विशेष पूजा अर्चना की। मकरसंक्रांत के अवसर पर जिले के अनेक स्थानों पर मेले का भी आयोजन किया गया है। हालांकि ज्योतिष पंचांग के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का शुभ मुहूत्र्त १४ जनवरी की शाम 7.14 से 15 जनवरी की दोपहर 12.36 बजे तक तथा महापुण्य काल मुहूर्त सुबह 7.14 से 9.01 बजे तक माना गया है। जिसके कारण यह पर्व दो दिनी मनाया जा रहा है। लेकिन प्रथम दिन ही जिले में पर्व की पौराणिक निर्धारित तिथि की महत्ता में मकरसंक्रांत हर्षाेउल्लास के साथ शुभारम्भ हुआ। पुराणों के अनुसार मकर संक्राति का पर्व बह्मा, विष्णु, महेश, गणेश सहित आदि शक्ति और सूूर्य की उपासना एवं आराधना का पावन व्रत माना जाता है। संत महर्षियों के अनुसार इनके प्रभाव से प्राणी की आत्मा शुद्ध होती है, संकल्प शक्ति बढ़ती है, ज्ञान का विकास होता है। मकर संक्रंाति इसी चेतना को विकसित करने वाला पर्व है। यह सम्पूर्ण भारतवर्ष में किसी न किसी रूप में आयोजित होता है। जबकि अन्य मान्यताओं में गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इसी दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में मिली थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा-सागर में मेला लगता है। मकर संक्रांति पर्व के मौके पर सोमवार की सुबह पावन नगरी अमरकंटक में हजारो श्रदलुओं की भीड़ जुटी रही। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा उद्गम कुंड में डुबकी लगाकर माता नर्मदा का पूजन अर्चन किया। साथ ही तिल-चावल, गुड़ सहित अन्य सामग्रियों का दान दिया। दरअसल अमरकंटक में पर्व की महत्ता एवं मेले में पहुंचने वाली भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं का जत्था एक सप्ताह पूर्व से आने आरम्भ हो गए थे। प्रदेश की जीवनदायिनी नदी मां नर्मदा का उद्गम स्थल होने के कारण इस दिन यहां देश- प्रदेश से हजारों की तादाद में श्रद्धालुु एवं पर्यटक पूजा अर्चना के साथ मेला देखने आते हैं। जबकि इस वक्त अमरकंटक में अत्याधिक ठंड पड़ता है, जिसके कारण दूधधारा, कपिलधारा से निकलने वाली दूधिया भाप पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना रहता है।
गोंगपा सम्मेलन में उमड़ रहे आदिवासी परिवार
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पिछले 17 साल से आयोजित किया जा रहा अखिल गोंगपा सम्मेलन 13 जनवरी से आरम्भ हुआ, जो 15 जनवरी को समाप्त होगा। इस गोंगपा सम्मेलन में गोंडी, धर्म, सांस्कृतिक, साहित्य सम्मेलन एवं फडापेन महापूजन समारोह आयोजित किए गए। जिसमें 13 जनवरी को युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनचेतना १४ जनवरी को गोंडी धर्म संसद, मातृ सम्मान, मातृ शक्ति महासम्मेलन, शोभायात्रा तथा 15 जनवरी को माई दर्शन और परिक्रमा जैसे कार्यक्रम सम्पन्न होंगे। इस दौरान हजारों की तादाद में प्रदेश सहित अन्य 10-12 प्रदेशों से आदिवासी परिवार सम्मेलन में पहुंचे। बताया जाता है कि इसमें दादा हीरा सिंह मरकाम (संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष जीजीपी) का जन्म दिवस मनाने तथा गोंडी धर्म पर आधारित दीक्षा समारोह का कार्यक्रम भी आयोजित कराया जाता है। अमरकंटक में विशेष सुरक्षाबलों को तैनात कर पर्यटक पुलिस चौकी को चौकसी बरतने की हिदायत दी गई है। जबकि मुख्यलाय स्थित सोन-तिपान नदी संगम घाट पर आयोजित होने वाले मेले के लिए दर्जनभर जवानों को तैनात किया गया है।
मेले का हुआ आयोजन
मकरसंक्रांत के अवसर पर अनूपपुर जिले की विभिन्न क्षेत्रों खासकर अमरकंटक में मेला जैसा माहौल बना हुआ है। जबकि जिला मुख्यालय अनूपपुर के सीतापुर गांव में सोन-तिपान संगम पर दो दिवसीय मेले, बरगंवा ग्राम पंचायत, सकरा ग्राम पंचायत सहित अन्य स्थानों पर भी मेले का आयोजन किया गया है।