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गांव के पांव: गांव की जमीन थी पथरीली, नाम पड़ा डोंगरिया, क्षेत्र में सबसे अधिक क्रेशर इसी क्षेत्र में हो रहे संचालित

पत्थरों के छोटे-छोटे टीले(डोंगरी) और कस्बा रूप में गांव होने पर इसे डोंगरियाकला कहा जाने लगा

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Village feet: Village land was rocky, named Dongria

गांव के पांव: गांव की जमीन थी पथरीली, नाम पड़ा डोंगरिया, क्षेत्र में सबसे अधिक क्रेशर इसी क्षेत्र में हो रहे संचालित

अनूपपुर। भारतीय संस्कृति मेंं अधिकांश गांवों के नाम उसके वास्तविक भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर नामित है। अनूपपुर जिले के कोतमा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत डोंगरिया कला का नाम भी वहां के भौगोलिक परिस्थतियों पर आधारित है। बुजुर्गो के अनुसार गांव की अधिकांश भूमि में पथरीली जमीन के कारण तथा पत्थरों के छोटे-छोटे टीले(डोंगरी) होने के कारण इस गांव का नाम डोंगरिया कला पड़ा। गांव की भूमि आज भी पथरीली है तथा प्रचुर मात्रा में पत्थर पाए जाने के कारण खनिज विभाग द्वारा इस गांव में कई उत्खनन पट्टे भी जारी किए गए हैं। बिजुरी नगर की सबसे ज्यादा क्रेशर इसी गांव में संचालित है। हालांकि कुछ हिस्से में खेती योग्य भूमि है। लेकिन यहां के ग्रामीण क्रेशर या आसपास के क्षेत्रों में मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार बिजुरी नगर से लगभग 8 किलोमीटर स्थित यह गांव प्रारंभ से ही खनिज संपदा से परिपूर्ण है। यहां पत्थर पर्याप्त मात्रा में हैं। 70 वर्षीय ग्रामीण मंडल सिंह पिता झूला सिंह बताते हैं कि गांव में कई छोटे-छोटे पत्थरों के टीले बने हुए हैं। इसके कारण ही इस गांव का नाम पड़ा। जिसे स्थानीय बोलचाल की भाषा में डोंगरी कहा जाता है। डोंगरी से ही इस गांव का नाम डोंगरिया कला पड़ा। ग्रामीण गया सिंह पिता कोंदरा ने बताया कि आज भी गांव में डोंगरी(पत्थरो के टीले)स्थित है। खनिज संपदा से परिपूर्ण इस गांव में पत्थरों का भंडार है। गांव में वर्तमान समय में 6 क्रेशर संचालित हैं तथा बिजुरी नगर के पत्थरों व गिटटी की आपूर्ति इसी गांव से पूरी होती है। जिसमें स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध होता है।
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