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शहर में 46.6 डिग्री और मुंगावली-चंदेरी में 47 डिग्री पर पारा, झुलसाती रहीं गर्म हवाएं

नौतपा के बाद बढ़ी तपन: सीजन का सबसे गर्म दिन, सामान्य से पांच डिग्री अधिक रहा दिन का तापमान

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शहर में 46.6 डिग्री और मुंगावली-चंदेरी में 47 डिग्री पर पारा, झुलसाती रहीं गर्म हवाएं

अशोकनगर. राजस्थान के रेतीले क्षेत्र से होते हुए जिले में प्रवेश कर रही गर्म हवाओं से नौतपा के बाद भी जिले में तपन बढ़ रही है। इससे पूरा जिला भट्टी की तरह तप रहा है, नौतपा के बाद लोगों को तपन से राहत की उम्मीद थी, लेकिन सोमवार को तपन और बढ़ गई। पारा 46.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया और सोमवार सीजन का अब तक का सबसे गर्म दिन रहा। साथ ही सुबह 9 बजे से ही 16 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गर्म हवाएं चलना शुरू हो गईं, जो देर रात तक
जारी रहीं।

सोमवार को दिन का अधिकतम तापमान बढ़कर 46.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक रहा। तो वहीं जिले के मुंगावली और चंदेरी में क्षेत्र में पारा 47 डिग्री तक पहुंच गया। साथ ही दिनभर लू की तपन झुलसाती नजर आई और इन गर्म हवाओं से बचने के लिए ट्रेनों और बसों में भी यात्रियों को खिड़की दरवाजे बंद करके यात्रा करना पड़ी। तो वहीं कूलर और पंखों से भी गर्म हवाएं आने से लोग भीषण गर्मी से परेशान रहे। मुंगावली व चंदेरी में पारा ज्यादा होने का कारण मौसम विशेषज्ञों द्वारा पथरीली जगह होना बताया जा रहा है, पथरीला क्षेत्र होने से तपन बढ़ जाती है और इससे यह तपन देर रात तक परेशानी बनी रही। वहीं पिछले वर्ष मई माह में जिले का सबसे अधिक तापमान 46 .8 डिग्री दर्ज किया गया था।

रात के समय न्यूनतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस पर रहा, जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक रहा। इससे पूरे गर्मी के सीजन में रविवार-सोमवार की रात सबसे गर्म रही। इससे देर रात तक लोग भीषण गर्मी और गर्म हवाओं से परेशान रहे। हालांकि मौसम विभाग ने रात के तापमान में और बढ़ोत्तरी होने का अनुमान बताया है।

जिले के 33 में से 32 तालाब सूखे

जिले में जल संसाधन विभाग के 94.462 एमसीएम पानी भराव क्षमता 33 तालाब और परियोजनाएं हैं। जिनमें 18.71 एमसीएम क्षमता के कोंचा व मोला बड़े बांध हैं। लेकिन 33 में से 32 तालाब पूरी तरह से सूख चुके हैं और सिर्फ शहर को पेयजल सप्लाई करने वाले अमाही तालाब में ही मात्र 10 फिट पानी बचा है।

भू-जलस्तर घटा तो सूखे दो हजार हैंडपंप

भू-जलस्तर गंभीर स्थिति तक घट जाने से जहां पीएचई विभाग के करीब साढ़े तीन सौं हैंडपंप सूख चुके हैं, तो वहीं स्कूल, आंगनवाडी और पंचायतों के भी करीब 500 हैंडपंप सहित ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में घरों में लगे लोगों के निजी हैंडपंप भी पूरी तरह से सूख गए हैं। वहीं ज्यादातर ट्यूबवेल भी दम तोड़ चुके हैं।

अस्पताल में 15 फीसदी उल्टी-दस्त से पीडि़त

गर्म हवाओं और डेढ़ सप्ताह से जारी लू से जिले में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है, अकेले जिला अस्पताल में ही रोज 700 से 800 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें 15 फीसदी उल्टी दस्त से पीडि़त हैं। वहीं पीलिया और टाईफाइड के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। इसका कारण गर्मी बताया जा रहा है।