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स्वर्ग की अप्सराएं यहां रातभर करती हैं नृत्य, ऐसे मनाती है उत्सव

रंगपंचमी पर मेला लगता है, जिसमें मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु राई नृत्य करवाते हैं। ढोलक की थाप और मंजीरों की धुन के बीच घुंघरू की झंकार के साथ नृत्य करती नृत्यांगना स्वर्ग से उतरी अप्सराओं के समान लगती हैं।

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स्वर्ग की अप्सराएं रातभर करती हैं नृत्य, ऐसे मनाती है उत्सव

स्वर्ग की अप्सराएं रातभर करती हैं नृत्य, ऐसे मनाती है उत्सव

अशोकनगर. मां जानकी के दरबार में लव-कुश का जन्मदिन मनाने के लिए स्वर्ग की अप्सराएं रातभर नृत्य करेंगी। रात के अंधेरे में मशाल की रोशनी और राई नृत्य की धूम लोगों को अपनी और आकर्षित करती है, शायद ये दुनिया में एकमात्र जगह है, जहां हर साल रंगपंचमी पर मेला लगता है, जिसमें मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु राई नृत्य करवाते हैं। ढोलक की थाप और मंजीरों की धुन के बीच घुंघरू की झंकार के साथ नृत्य करती नृत्यांगना स्वर्ग से उतरी अप्सराओं के समान लगती हैं।

हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित करीला मेले की, जो इस बार भी 11 से 13 मार्च तक लग रहा है, तीन दिवसीय इस मेले में देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रंगपंचमी के दिन यहां लव-कुश का जन्मदिन मनाया जाता है, इस दिन अपनी मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु माता के दरबार में राई नृत्य करवाते हैं। ये मेला रंगपंचमी पर २४ घंटे चलता है, जिसमें रात में मशाल की रोशनी में नृत्य करती महिलाएं आकर्षण का केंद्र होती है, कहा जाता है कि लव-कुश के जन्म उत्सव को मनाने के लिए सीधे स्वर्ग से अप्सराएं धरती पर उतरती हैं और रातभर खुशी में झूमती हुई नृत्य करती है।

दरअसल करीला में मां सीता का मंदिर है, कहा जाता है कि भगवान राम से वियोग के बाद माता ने यहीं आश्रय लिया था, लव-कुश का जन्म भी यहीं हुआ था, यही कारण है कि यहां माता सीता की बगैर भगवान राम के अकेली प्रतिमा है, जिनके दर्शन करने के लिए यूं तो सालभर ही श्रद्धालु आते हैं, लेकिन रंगपमंची मेले में विशेष रूप से श्रद्धालु लाखों की संख्या में पहुंचते हैं। श्रद्धालु माता से बच्चों के लिए मन्नत मांगते हैं, मन्नत पूरी होने पर राई नृत्य करवाते हैं, राई नृत्य में रात में ढोल, नगाड़े की थाप और मंजीरों की धुन के बीच घुंघरू की झंकार के साथ नृत्य करती नृत्यांगना स्वर्ग से उतरी अप्सराओं के समान लगती हैं। बताया जाता है कि पहले यहां केवल बेडिय़ा जाति की महिलाएं ही नृत्य के लिए आती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से कंजर जाति की महिलाएं भी अधिक संख्या में पहुंच रही हैं।

ऐसे पहुंचे करीला मेला
आप भी माता जानकी दर्शन करने जाना चाहते तो आपको मध्यप्रदेश के अशोकनगर या विदिशा जिले में पहुंचना होगा, इन दोनों शहरों से करीला स्थान की दूरी काफी कम है, अशोकनगर शहर से करीला मां जानकी का मंदिर महज 35 किलोमीटर दूर है, वहीं विदिशा शहर से 80 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा आप गूगल मेप से भी माता जानकी मंदिर पहुंचने का आसान रास्ता सर्च कर पहुंच सकते हैं।