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पसंद की हुई साड़ी नहीं खरीद सकी तो गायत्री ने खुद बना दीं डेढ़ हजार साड़ियां

साड़ी इंफ्यूएंसर बन चुकी है गायत्री, जो महिलाओं व युवतियों को करती हैं साड़ी पहनने प्रेरित

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Ashok Nagar Chanderi Sari Gayatri

Ashok Nagar Chanderi Sari Gayatri

अशोकनगर. आर्थिक तंगी के चलते पसंद की हुई साड़ी नहीं खरीद सकी तो खुद ही साड़ी बनाना सीखा और अब तक डेढ़ हजार से अधिक प्रसिद्ध चंदेरी साड़ियां बना दीं। साथ ही खुद भी साड़ी इंफ्यूएंसर बन चुकी है और महिलाओं व युवतियों को साडिय़ां पहनने प्रेरित करती हैं। यह कहानी है चंदेरी की 38 वर्षीय गायत्री कोली की। आठवी तक पढ़ी गायत्री 17 साल पहले दुकान पर साड़ी खरीदने गई तो उसे जो साड़ी पसंद आई वह महंगी थी और पैसे न होने की वजह से वह उसे खरीद नहीं पाई। इससे उन्होंने खुद ही साड़ी बनाना सीखा और पिछले 15 साल में गायत्री कोली 1500 से अधिक चंदेरी साडिय़ां बना चुकी है। साथ ही डिजाइनिंग के लिए खुद का बैंगलोरी जेकॉर्ड खरीदा और वह खुद ही डिजाइनिंग करती हैं। इससे वह आत्मनिर्भर बन गईं। खुद नहीं पढ़ सकीं लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को स्नातक तक पढ़ाया है, साथ ही बच्चों को आगे की पढ़ाई भी कराएंगी।

पिता से सीखा करघा चलाना व बुनाई का धागा भरना
गायत्री कोली कहती हैं कि उन्होंने अपने पिता से हथकरघा चलाना सीखा और उसमें बुनाई का धागा भरना सीखा। इससे वह खुद ही हथकरघे में बुनाई करती हैं और आकर्षक किनार व ताने की जुड़ाई भी खुद ही करती हैं। साथ ही हथकरघे में आने वाली खराबी को भी खुद ही सुधार लेती हैं। पहले वह किराए के मकान में रहती थीं, इससे 14 साल तक किराए के उसी कमरे में लूम चलाया। पति बलवीर कोली टेलरिंग करते हैं। एक साल पहले खुद का मकान खरीदकर गायत्री व उनका परिवार अपने घर में रहने लगे हैं।

एक हजार से 10 हजार रुपए तक की बनाईं चंदेरी साड़ी
गायत्री कोली ने बताया कि सप्ताह में अधिकतम दो साडिय़ां ही बन पाती हैं और कई बार एक मंहगी साड़ी बनाने में ही एक सप्ताह से अधिक समय लग जाता है। इससे वह अब एक हजार रुपए कीमत से लेकर 10 हजार रुपए कीमत तक की चंदेरी साड़ी बना चुकी हैं। उनका कहना है कि एक हजार रुपए कीमत की साड़ी वह इसलिए बनाती हैं, ताकि हर कोई उसे खरीद सके।

महिलाओं व युवतियों को साड़ी पहनने करती हैं प्रेरित
गायत्री कोली जहां खुद भी साड़ी पहनती हैं और महिलाओं व युवतियों को भी साड़ी पहनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि साड़ी सिर्फ भारतीय पहनावा ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्रतीक है और भारतीय संस्कृति में साड़ी को स्त्री के सम्मान एवं रक्षा का प्रतीक माना गया है। इसलिए महिलाओं व युवतियों को साड़ी पहनना चाहिए। उनका कहना है अन्य तरह के पहनावों की तुलना में महिलाएं साड़ी में ज्यादा अच्छी लगती हैं।