
पशु चारा निर्यात पर लगा प्रतिबंध तो भूसा व्यापारी बोले एक हजार मजदूर हो जाएगें बेरोजगार
अशोकनगर. कलेक्टर आर उमा महेश्वरी द्वारा जिले में पशु धन की संख्या को देखते हुए ग्रीष्मकाल में पशु चारे की उपलब्धि सुनिश्चत करने के लिए जिले की सीमा के बाहर पशु चारा निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। आदेश में पशुओं के आहार के रूप में उपयोग में लाने वाले समस्त प्रकार के चारे, घांस, भूसा, ज्वार के बंडल, प्याज, धान के डंठल एवं पशुओं द्वारा खाये जाने वाले अन्य किस्म के चारे पर जिले की सीमा के बाहर निर्यात प्रतिबंधित रहेगें। कोई भी कृषक, व्यापारी व्यक्ति, निर्यातक उपरोक्त क्रम में से किसी भी प्रकार के पशुचारे का किसी भी वाहन, मोटर, रेल, यान, अथवा पैदल जिले के बाहर मेरे बिना अनुज्ञा-पत्र के निर्यात नहीं करेगा। शासकीय उपयोग के लिये भूसा एवं पशुचारे का परिवाहन संबंधित अनुविभागीय अधिकारी की अनुमति से किया जायेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरुद्व भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अन्तर्गत दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी।
व्यापारियों ने कहा गेंहू के भूसा पर लगे प्रतिबंध अन्य पर नही
जिला मुख्यालय पर भूसा खरीदने वाले भूसा व्यापारियों का कहना है कि पशु चारे में पशुओं के लिए गेंहू के भूसे का सबसे ज्यादा उपयोग होता है। मसूर, सरसों व चने के भूसे का उपयोग कम मात्रा में होता है जबकि गल्ला मंडी में १० हजार क्विंटल मसूर व सरसों की आवक हो रही है। करीब ५ हजार क्विंटल प्रतिदिन मसूर व ६ हजार क्विंटल सरसों का भूसा आ रहा है। गेंहू की भूसा की अभी आवक भी नही हो रही है। भूसा व्यापारी संघ के सुयोग जैन छोटू ने बताया कि गेंहू के भूसे पर प्रतिबंध हो जाए लेकिन अन्य भूसे पर प्रतिबंध खोला जाए। व्यापारी गेंहू के भूसे का व्यापार नही कर रहे हैं। प्रतिबंध से भूसे का व्यापार बंद हो जाएगा। जिससे भूसा व्यापारियों के साथ करीब एक हजार मजदूर बेरोजगार हो जाएगें। वहीं किसानों का भी भूसा खराब हो जाने से उन्हें पैसा नही मिलेगा। गौशालाएं १० प्रतिशत ही मसूर का भूसा खरीदते हैं और जिले में करीब दो लाख क्विंटल मसूर के भूसे का स्टॉक होता है।
यहां भूसा में पुलिस पर वसूली का आरोप,
भूसा कारोबारी बोले हर चौराहे पर कहां से दें पैसे, बोले नहीं करेंगे कारोबार
अशोकनगर. भूसा कारोबारियों ने भूसा के कारोबार पर पुलिस पर वसूली का आरोप लगाया है, साथ ही कहा कि हर चौराहे पर पुलिस रोककर पैसे वसूलती है और इस तरह एक ही ट्राली के बार-बार पैसे देना पड़ते हैं। साथ ही भूसा कारोबारियों ने भूसा खरीदी करने से इंकार कर दिया। इससे ट्रालियों की लाइन लग गई।
वायपास स्थित धर्मकांटे पर भूसा कारोबारी एकत्रित हुए और भूसा न खरीदने की घोषणा कर दी। इससे ट्रालियों की कतारें लग गईं। कुछ दूरी पर ही पुलिस की अस्थाई चौकी थी तो सूबेदार अजीतसिंह व पुलिसकर्मी उनकी समस्या सुनने पहुंचे। जहां भूसा कारोबारियों व किसानों ने पुलिस पर भूसा की ट्रालियों से पैसे वसूलने का आरोप लगाया। शहर में करीब 20 भूसा कारोबारी हैं, जो एकत्रित होकर आरआई से भी मुलाकात करने गए।
एक ट्राली के ही चार-चार बार देना पड़ रहे पैसे-
भूसा कारोबारियों व किसानों ने कहा कि कई बार एक ट्राली के ही चार-चार बार रुपए देना पड़ते हैं। पुलिस रास्ते में रोककर रसीद बनवाने के लिए कहती है और वहां से निकलते ही अगले पॉइंट पर फिर पुलिस रोककर रसीद बनाती है। इससे एक ही ट्राली के चार-चार जगह पर रुपए देना पड़ते हैं। इससे नुकसान होता है।
स्पीक आउट-
जगह-जगह पुलिस खड़ी रहती है जो रोककर भूसा वालों से रसीद के नाम पर पैसे लेती है। हर जगह रोका जाता है और हर जगह रसीद कटवाने की बात कही जाती है। इससे अब लोग भूसा लेकर आने में डरने लगे हैं।
गब्बर यादव, जिलाध्यक्ष भूसा कारोबारी संघ
थाने के सामने से जितनी बार निकलते हैं, उतनी ही बार रसीद बनती है और रसीद के ज्यादा पैसे मांगे जाते हैं, रसीद न बनवाने पर 100 रुपए तो ले ही लिए जाते हैं।
महेंद्र अहिरवार, किसान
आज भूसा लाते समय राजमाता चौराहा पर 500 रुपए की रसीद बनी और अगले चौराहे पर पुलिस ने रोककर फिर 500 रुपए की रसीद बनवाने कहा। यदि इसी तरह रसीद में पैसे देते रहे तो फिर क्या लाभ है।
साबिर अली, किसान
Published on:
15 Mar 2022 09:59 pm
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