
बीजासन माता की महिमा निराली, आंखों में पानी लगाने से दूर हो जाता है रोग
अशोकनगर/कदवाया. मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित कदवाया में बीजासन माता का मंदिर स्थित है, कहा जाता है कि माता के दरबार में आने और माता की पूजा अर्चना कर यहां का जल आंखों में लगाने से कई प्रकार के नेत्र रोग दूर हो जाते हैं, यही कारण है कि माता के दरबार में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
जिलेभर में छोटे-बड़े करीब 900 माता मंदिर हैं, जिनमें एक मंदिर में विराजमान मां को नेत्ररोग ठीक करने के लिए जाना जाता है। जहां पर लोग मां के जलाभिषेक के जल को आंखों से लगाते हैं और कहा जाता है कि इससें नेत्ररोग ठीक हो जाते हैं। बाद में श्रद्धालु मंदिर में आकर मां को सोने-चांदी की आखें अर्पित करते हैं।
हम बात कर रहे हैं जिले के कदवाया स्थित प्राचीन मां बीजासन मंदिर की। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर में जहां आम दिनों में तो सैकड़ों लोग पहुंचते ही हैं, वहीं प्रत्येक चतुर्दशी को दूर-दूर से करीब 10 हजार लोग आते हैं। जहां राक्षस पर मां बीजासन विराजमान हैं और दोनों हाथों में नरमुंड हैं, प्रतिमा के एक तरफ भगवान गणेश और दूसरी तरफ अष्टभुजी मां दुर्गा की प्रतिमा है। जहां पंडा परिवार मां बीजासन की पूजा करता है, गोपाल पंडा ने बताया कि किसी को आंखों से संबंधित कोई समस्या है तो वह रोज सुबह किए जाने वाले मां के जलाभिषेक का जल तीन बार अपनी आखों से लगाता है तो नेत्र रोग ठीक हो जाते हैं। नेत्र रोग ठीक होने पर हजारों लोग सोने-चांदी की आंखे मां को अर्पित कर चुके हैं, हालांकि सोने-चांदी की यह आंखे पतली पन्नी की तरह होती हैं।
मंदिर में विराजमान मां बीजासन की प्रतिमा दिन में तीन रूप बदलती हैं। सुबह के समय बाल्य अवस्था, दोपहर 12 बजे से युवा अवस्था और शाम को 6 बजे से मां की प्रतिमा वृद्धावस्था में नजर आती है। रोज सुबह 4 बजे मां का जलाभिषेक व पूजा होती है और रात को 8 बजे आरती के साथ मंदिर बंद हो जाता है। मंदिर दिनभर श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए खुला रहता है, जहां पर गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र से भी श्रद्धालु दर्शन व पूजा करने के लिए आते हैं।
Published on:
01 Oct 2022 03:36 pm
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