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शीतलहर से 50 फीसदी फसलों को नुकसान, किसान बोले-दो दिन में खराब हो गई फसल

मौसम की मार से किसान फिर हुए चिंतित

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शीतलहर से 50 फीसदी फसलों को नुकसान, किसान बोले-दो दिन में खराब हो गई फसल

अशोकनगर. जिले में लगातार छह दिन से जारी शीतलहर अब नुकसान का कारण बनने लगी है। पिछले दो दिन में जिले की दर्जनों बीघा की सब्जियों पर शीतलहर का प्रकोप दिखने लगा है और खेतों में खड़े इन सब्जियों के पौधों के पत्ते मुरझाकर सूखने लगे हैं तो वहीं टमाटर पीले पडऩे लगे हैं, वहीं बैगन सहित अन्य सब्जियों में भी नुकसान साफ तौर पर दिख रहा है। इससे किसानों को शीतलहर से हजारों रुपए का नुकसान हो गया है।

जिले के कचनार क्षेत्र में इस बार शीतलहर ने सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचाया है और शीतलहर की चपेट में आए पौधों को देखकर ही नुकसान का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। किसान नारायण कुशवाह ने बताया कि उनके दो से तीन बीघा जमीन में इस बार सब्जियां लगी हुई हैं, लेकिन शीतलहर की वजह से फसलें खराब हो गई हैं। किसान कैलाश कुशवाह और भैयालाल प्रजापति ने भी यही समस्या बताई। किसानों का कहना है कि उन्होंने मेहनत करके पौधे तैयार किए और जैसे ही उनमें सब्जियां लगने लगीं तो शीतलहर परेशानी बन गई है। शीतलहर की वजह से पेड़ के पत्ते मुरझाकर काले पडऩे लगे हैं तो कई पेड़ों से तो पत्ते ही सूखकर गायब हो चुके हैं। वहीं इन पौधों में लगे टमाटर भी मुरझा गए हैं और पीले पड़कर नुकसान को खुद ही बयां कर रहे हैं। बैगन के पत्ते भी मुरझाए, इसके अलावा गिलकी, धनिया सहित अन्य फसलें भी नुकसान की वजह से सूखने गली हैं। शीतलहर से नुकसान का असर सड़क किनारे खड़े बेसरम के पेड़ों को देखकर लगाया जा सकता है। इन पेड़ों के पत्तों का हरा रंग गायब हो चुका है और पत्ते मुरझाकर पूरी तरह से काले होने लगे हैं। वहीं पहले बोई जा चुकी फसलों में भी शीतलहर का असर दिख रहा है। जिन फसलों में फूल आना शुरू हो गया था, शीतलहर की चपेट में आने से फसलों को वह फूल मुरझाकर टपकने लगा है। वहीं न्यूनतम तापमान कम रहने से अभी भी शीतलहर जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।

अब पौधे पूरी तरह सूख जाएंगे

शीतलहर की वजह से सब्जियो में करीब 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान हो चुका है और पिछले दो दिन में ही क्षेत्र की सब्जियां शीतलहर की चपेट में आई है। हालांकि किसानों का यह भी कहना है कि शीतलहर का नुकसान तुरंत ही नहीं दिखता है, दो-तीन दिन बीत जाने के बाद साफ तौर पर सब्जियों में असर दिखाई देने लगेगा और पौधे पूरी तरह से सूख जाएंगे। हालांकि जिले के कई गांवों में दर्जनों बीघा की सब्जी फसलें खराब हो जाने से जहां किसानों को लाखों रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा हे तो वहीं कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को नुकसान की कोई जानकारी नहीं है और न हीं शीतलहर की कोई जानकारी है।

ऐसे करें शीतलहर से फसलों का बचाव

ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के जिले के किसानों को शीतलहर से फसलों को बचाने के सुझाव दिए है। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों का कहना है कि खेत की मेढ़ों पर किसान शाम के समय धुंंआ करें, ताकि धुंआ फसलों के ऊपर एक लेयर बना सके। इससे फसलों को शीतलहर से बचाया जा सकता है। इसके लिए किसानों को रोजाना ही अपनी मेढ़ों पर कड़ाके की सर्दी के दौरान शाम को नियमित रूप से धुंआ करना चाहिए।