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रेकॉर्ड में शहर व आसपास के 16 गांवों में चार हजार बीघा सरकारी जमीन, लेकिन मौके पर कुछ भी नहीं

भू-अभिलेख में तो शहर और आसपास के 16 गांवों में चार हजार बीघा सरकारी जमीन दर्ज है, लेकिन मौके पर यह जमीन गायब है।

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Tribal captures forest land pledging lease

Tribal captures forest land pledging lease

अशोकनगर. जिले में सरकारी जमीनों को संरक्षित रखने जिम्मेदार प्रशासन कितना सजग है। अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि भू-अभिलेख में तो शहर और आसपास के 16 गांवों में चार हजार बीघा सरकारी जमीन दर्ज है, लेकिन मौके पर यह जमीन गायब है। आरटीआइ से मिली जानकारी में जब यह जमीन दर्ज मिली, तो एडवोकेट बाबूलाल यादव ने अधिकारियों को नोटिस देकर पूछा कि यह जमीन कहां गई, तो कार्रवाई तो दूर की बात अधिकारी तीन महीने में भी यह नहीं बता सके। नतीजतन जिले में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और निर्माण का कार्य बेखौफ होकर जारी है।

एडवोकेट बाबूलाल यादव को सूचना के अधिकार के तहत तहसील अशोकनगर से शहर और आसपास के 16 गांवों में सरकारी जमीनों की जानकारी मिली। इसमें शहर के 25 स्थानों पर 28 9.16 8 हेक्टेयर सरकारी भूमि बताई गई। वहीं आसपास के बरखेड़ी, मारूप, पड़रिया, परासरी टीका, सिंगवासा, आंवरीमाफी, पछारी, रुसल्लाखुर्द, बांसाखेड़ी, पथरिया, पंवारगढ़, टकनेरी, शंकरपुर, मलखेड़ी, मोहरी राय और इटवा गांव में 515.740 हेक्टेयर सरकारी जमीन बताई।

दोनों को मिलाकर अशोकनगर शहर और शहर से पांच किमी की सीमा में 804.908 हेक्टेयर (करीब 4024 बीघा) सरकारी जमीन राजस्व रेकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन शहर में मौके पर इन जमीनों पर कॉलोनियां बनी हुई हैं, तो वहीं गांवों में भी सरकारी जमीनों पर मकान बन गए हैं। इसके अलावा सैकड़ों बीघा सरकारी जमीन खेतों में तब्दील हो चुकी है और इस पर खेती की जा रही है। लेकिन इसकी चिंता न तो राजस्व विभाग को है और न हीं जिम्मेदार जिला प्रशासन को नतीजतन सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और खरीद-फरोख्त का काम बेखौफ जारी है।

आठ अधिकारियों से पूछा, लेकिन किसी ने भी नहीं दिया ध्यान
रेकॉर्ड में दर्ज इस सरकारी जमीन की जानकारी मिलने के बाद जब एडवोकेट बाबूलाल यादव ने सीपीसी की धारा 80 के तहत अधीक्षक भू-अभिलेख अरविंद जैन, राजस्व निरीक्षक दोजाराम अहिरवार, आशीषकुमार तिवारी, पटवारी हेमंतकुमार, तहसीलदार सूर्यकांत त्रिपाठी, एसडीएम नीलेश शर्मा और सीएमओ बीडी कतरोलिया को नोटिस जारी कर पूछा कि आरटीआइ में बताई गई यह जमीन आखिर मौके से कहां है। लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी जवाब तो दूर की बात अधिकारियों ने इस सरकारी जमीन की जानकारी तक जुटाना मुनासिब नहीं समझा और न हीं किसी जमीन पर अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए।

चरनोई भूमि गायब होने से सड़कों पर परेशानी बन रहे मवेशी
शहर और आसपास के गांवों चरनोई, कदीम, पठार, खदान सहित विभिन्न प्रकार की इस चार हजार बीघा सरकारी जमीन में से करीब 500 हेक्टेयर जमीन चरनोई की थी। लेकिन अतिक्रमण और निर्माण हो जाने की वजह से यह सरकारी जमीन खत्म होने से हजारों मवेशी शहर की सड़कों पर अतिक्रमण जमाए हुए हैं, जो वाहन चालकों के लिए तो परेशानी बने ही हुए हैं। वहीं सड़कों और गलियों में दौड़ लगाकर लोगों को घायल भी कर रहे हैं, इससे शहर की सभी सड़कों और चौराहों व गलियों में आवारा मवेशी डेरा जमाए हुए हैं और लोगों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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