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आखिरकार जन्माष्टमी पर पूरा होगा नगरवासियों का 8 साल पुराना संकल्प

शुरुआत में बजट अनुसार गायों को मिलेगा ठिकाना...

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अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर की जनता का संकल्प इस बार जन्माष्टमी पर पूरा होने जा रहा है। दरअसल अब से लगभग 8 साल पहले कृषि उपज मंडी के पीछे गौशाला निर्माण की आधार शिला उस समय रखी गई थी, जब स्वामी गणेशानंद जी महाराज ने ईसागढ़ में गौकथा का वाचन किया था। जिसके बाद इस जन्माष्टमी से ईसागढ़ में बीमार और लाचार गायों को आगामी ठिकाना मिलना शुरू हो जाएगा।

जानकारी के अनुसार कृषि उपज मंडी के ठीक पीछे बीते दो साल से बनने वाली आधुनिक सुविधाओं से लैस गौशाला का निर्माण अंतिम चरण में है। गौ सेवकों ने गौचारण के लिए भूसा और अन्य सामग्री भी पहुंचाना शुरू कर दिया है।

गौशाला में नौ दिवसीय अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया जा रहा है। जो आगामी जन्माष्टमी को पूर्ण हो जाएगा। अखंड रामायण पाठ पूर्ण होने के बाद ही गौशाला का विधि विधान से शुभारंभ होगा।

हालांकि, 108 गायों के लिए बनाई गई गौशाला में शुरुआत में बजट के अनुसार ही गायों को रखा जाएगा। कृषि उपज मंडी के पीछे गौशाला निर्माण की आधार शिला अब से लगभग 8 साल पहले उस समय रखी गई थी। जब स्वामी गणेशानंद जी महाराज ने ईसागढ़ में गौकथा का वाचन किया था। गौकथा के समापन पर उन्होंने ईसागढ़ में एक गौशाला का निर्माण किए जाने की इच्छा व्यक्त की थी।

उसी समय मंच से तमाम समाजसेवियों ने गौशाला निर्माण के लिए बड़ी दानराशि देने की घोषणा की। लेकिन कुछ समय बाद ही मामला अधर में लटक गया। इस बात की जानकारी जब स्वामी गणेशानंद को मिली तो वह ईसागढ़ पहुंचे और एक समिति की गठन कर गौशाला निर्माण की कार्य योजना बनाई। परिणाम यह रहा कि सभी लोग एक बार फिर एकजुट होकर गौशाला निर्माण में जुट गए।

यही नहीं देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों गौ कथाएं कर चुके योगगुरू स्वामी रामदेव जी के परम शिष्य और भाजपा सरकार में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त स्वामी गणेशानंद महाराज ने तो गौशाला निर्माण स्थल पर ही डेरा डाल लिया। सबसे पहले कृषि उपज मंडी के पीछे स्थित उबड़-खाबड़ जमीन को समतल कराया गया। इस काम में ही लाखों रूपए खर्च हो गए। स्वामीजी के अनुसार जमीन के समतलीकरण से लेकर शेड और अन्य कार्यों में 35 लाख रुपए से भी ज्यादा का खर्चा हो चुका है।

बजट के अनुसार शुरू होगी 108 गायों की गौशाला
स्वामी गणेशानंद जी ने बताया कि श्री कृष्ण क्रांति गौशाला का निर्माण 108 गायों की क्षमता को देखकर किया गया है। हालांकि, इसे समय के अनुसार बड़ाया जा सकता है। लेकिन वर्तमान समय में गौशाला संचालन समिति के पास इतना बजट नहीं है कि वह 108 गायों को गौशाला में रख सके। इसलिए शुरुआत में बजट अनुसार ही गौशाला में गायों को रखा जाएगा। जैसे-जैसे गौशाला को लोगों और सरकार का सहयोग मिलता जाएगा। गायों की संख्या बढ़ती जाएगी। उन्होंने बताया कि गौशाला में एक गाय के रखरखाब के लिए कम से कम 100 रुपए की आवाश्यकता होती है।

यह सब गौशाला संचालन समिति को स्थानीय स्तर पर ही एकत्रित करना है। इसके अलावा समिति ने गायों को गोद लेना भी अपनी योजना में शामिल किया है। इसके तहत गौसेवक या क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि अपनी क्षमता अनुसार गायों को गोद ले सकते हैं। अभी तक आधा दर्जन गायें लोग गोद ले चुके हैं। इसी तरह लोग आगे आएंगे तो यह योजना भी गौशाला संचालन में मील का पत्थर साबित होगी।

गौमूत्र और गोबर का भी होगा उपयोग
गौशाला के विधिवत संचालन के बाद गौ मूत्र और गाय के गोबर का भी सदुपयोग हो सके। इस बात पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। स्वामी जी के मानें तो गौ मूत्र में मौजूद गुणकारी तत्व विभिन्न बीमारियों से निबटने की क्षमता रखते हैं। वहीं गोबर से बनाया गया खाद रासायनिक खादों की तुलना में कई गुना बेहतर होता है।

गले में रस्सी नहीं बंधी तो जन्माष्टमी के बाद गौशाला में पहुंचेगी गाय
नगर में आवारा रूप से अपनी गायों को छोडऩे वाले गौ पालकों से स्वामी गणेशानंद ने अपील की है कि वह अपनी गायों को आवारा रूप से सड़कों पर नहीं छोड़ें। जैसे ही गौशाला शुरू होगी सड़क पर घूमने वाली सभी गायों को गौशाला में पहुंचा दिया जाएगा।

इसके बाद यदि कोई गौ पालक गाय पर अपना अधिकार भी जमाता है तो उसे गाय वापस नहीं दी जाएगी। गौशाला के शुभारंभ पर गाय लाने वाले कार्यकर्ता सिर्फ उन्हीं गायों को छोड़ेंगे। जिनके गले में काली या फिर अन्य किसी रंग की रस्सी बंधी होगी।

शुभारंभ पर जन प्रतिनिधि रहेंगे मौजूद, पौधरोपण भी होगा
गौशाला के शुभारंभ के मौके पर सांसद केपी यादव, क्षेत्रीय विधायक गोपाल सिंह चौहान, मुंगावली विधायक बृजेन्द्र सिंह यादव, अशोकनगर विधायक जजपाल सिंह जज्जी सहित तमाम पूर्व विधायक और विभिन्न राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया जा रहा है।

स्वामी गणेशानंद जी महाराज ने बताया कि इसी दिन से अशोकनगर जिले में पौधरोपण अभियान की शुरूआत भी की जाएगी। इस अभियान के तहत जिले के लगभग सभी गांवों में पांच लाख से भी ज्यादा पौधे रोपे जाएंगे। पौधों की ठीक तरह से देखभाल हो इसके लिए लोगों से संकल्प पत्र भी भरवाए जाएंगे। पौधरोपण का यह अभियान दो साल तक चलेगा।