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दुनिया का अनोखा मंदिर, जहां भगवान राम के बिना होती है मां जानकी की पूजा

करीला एक ऐंसा मंदिर है, जहां सीताजी की पूजा भगवान राम के बिना होती है

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karila mandir

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अशोकनगर. आमतौर पर हम मंदिरों व तस्वीरों में भगवान राम व सीताजी को एक साथ देखते हैं, एक साथ ही राम व सीताजी की पूजा भी करते हैं। लेकिन दुनिया में करीला एक ऐंसा मंदिर है, जहां सीताजी की पूजा भगवान राम के बिना होती है।
करीला के मंदिर को मां जानकी मंदिर के नाम से जाना जाता है और यहां पर मां जानकी की प्रतिमा लव-कुश व महर्षि बाल्मीकि के साथ विराजमान है। लेकिन इन पुरानी प्रतिमाओं में उनके साथ भगवान राम नहीं है और यहां पर भगवान राम के बिना ही मां जानकी की पूजा होती है। कहा जाता है कि जब भगवान राम ने मां सीता का त्याग कर दिया था तो वह यहीं पर महर्षि बाल्मीकि आश्रम में रुकीं और यहीं पर लव-कुश का जन्म हुआ। साथ ही महर्षि बाल्मीकि ने यहीं पर लव-कुश को युद्ध व संगीत की शिक्षा दी।


चार पहचान, जो रामायणकालीन होने का देती हैं संकेत
अशोकनगर. संस्कृत विद्यालय मल्हारगढ़ के आचार्य पंडित विश्वनाथ पुरोहित के मुताबिक वैसे तो यह हजारों-लाखों साल पुरानी बात है, इसलिए इसे कोई प्रमाणित नहीं कर सकता है कि भगवान राम द्वारा त्याग दिए जाने के बाद मां सीता यहीं पर रुकीं। लेकिन चार ऐसी पहचान है, जिनसे इसे रामायणकालीन कहा जाता है। यहीं पर कोंच नदी है, जिसका पूर्व में कचम नदी कहा जाता था। कोंच नदी पर होने की वजह से ही करीला के पास बने बांध को कोंचा बांध कहा जाता है। यह महर्षि बाल्मीकि आश्रम है और पूर्व में यहां पर करील के वृक्षों का वन हुआ करता था, चौथी बात यह कि यहां पर मां जानकी की पूजा भगवान राम के बिना होती है।

मेले में इस बार यह प्रतिबंध-
-मंदिर में अगरबत्ती पर प्रतिबंध है और अंदर नारियल ले जाने पर भी रोक लगाई गई है, बाहर ही नारियल एकत्रित कराए जाएंगे।
- मंदिर में इस बार जूता-चप्पल पहनकर प्रवेश करने पर भी प्रशासन ने प्रतिबंध लगा दिया है, इससे जूता-चप्पल बाहर छोडऩा पड़ेेंगे।
- जिपं द्वारा परिक्रमा मार्ग के पास से मंदिर तक पहुंचने पहाड़ी पर बनवाई गई सीढिय़ों पर भी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा।
खास-खास-
- 100 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी
- 2 ड्रोन से मेला क्षेत्र पर नजर रखी जाएगी
- 2000 पुलिस जवान सुरक्षा में तैनात रहेंगे
- 1000 कर्मचारियों की ड्यूटी रहेगी
- 40 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
- 300 अस्थाई टॉयलेट बनाए गए हैं
- 100 स्थानों पर पेयजल के लिए टोंटी लगीं
- 300 टैंकरों से पेयजल की व्यवस्था होगी