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भगवान राम के बिना होती है यहां सीता माता की पूजा, यहीं हुआ था लव-कुश का भी जन्म

माता के दर्शन मात्र से ही हर मनोकामना पूरी हो जाती है, इसके बाद जिनकी मनोकामना पूरी होती है, वे यहां राई नृत्य करवाते हैं।

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भगवान राम के बिना होती है यहां सीता माता की पूजा, यहीं हुआ था लव-कुश का भी जन्म

भगवान राम के बिना होती है यहां सीता माता की पूजा, यहीं हुआ था लव-कुश का भी जन्म

अशोकनगर. कहा जाता है कि भगवान राम से वियोग होने के बाद सीता माता ने पूरा समय यहीं गुजारा था, यही कारण है कि यहां भगवान राम के बगैर ही अकेली सीता माता की प्रतिमा है, ऐसी प्रतिमा देशभर में और कहीं नहीं है, यहीं लव-कुश का भी जन्म हुआ था, माता के दर्शन करने के लिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं, लोगों का मनना है कि माता के दर्शन मात्र से ही हर मनोकामना पूरी हो जाती है, इसके बाद जिनकी मनोकामना पूरी होती है, वे यहां राई नृत्य करवाते हैं।

हम बात कर रहे हैं करीला मेले की, ये मेला मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में करीला नामक स्थान पर लगता है, भगवान श्री राम द्वारा त्याग करने के बाद सीता माता ने यहीं अपना समय गुजारा था, यहीं पर लव-कुश का जन्म भी हुआ था, हर साल रंगपंचमी पर यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं, यहां जिन लोगों की मनोकामना पूरी होती है, वे करीला मेले में राई नृत्य करवाते हैं। यहां आयोजित होने वाले राई नृत्य को देखने के लिए भी दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं, क्योंकि यहां आस्था और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

ऐसे पहुंचे करीला मेला
आप भी माता जानकी दर्शन करने जाना चाहते तो आपको मध्यप्रदेश के अशोकनगर या विदिशा जिले में पहुंचना होगा, इन दोनों शहरों से करीला स्थान की दूरी काफी कम है, अशोकनगर शहर से करीला मां जानकी का मंदिर महज 35 किलोमीटर दूर है, वहीं विदिशा शहर से 80 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा आप गूगल मेप से भी माता जानकी मंदिर पहुंचने का आसान रास्ता सर्च कर पहुंच सकते हैं।

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बताया जाता है कि भगवान राम के साथ वनवास काटने के बाद जब सीता माता अयोध्या आई थी, इसके बाद भगवान राम द्वारा त्याग करने के बाद सीता माता वाल्मिकी आश्रम में शरण ली थी और उन्होंने करीला में ही लवकुश को जन्म दिया था, माता जानकी का मंदिर यहां सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहां पहुंचने के बाद आपको प्रकृति की अनुपम छटा देखने को मिलती है। वैसे तो यहां सालभर ही श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन मेले के दौरान यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।