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करीला मेले में आज से मचेगी राई नृत्य की धूम, मन्नत पूरी होने पर आप भी करा सकते हैं ये नृत्य

आज से तीन दिवसीय करीला मेले की शुरूआत हो चुकी है, श्रद्धालुओं का मानना है कि माता सीता के दरबार में हाजरी लगाने से हर मनोकामना पूरी होती है.

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करीला मेले में आज से मचेगी राई नृत्य की धूम, मन्नत पूरी होने पर आप भी करा सकते हैं ये नृत्य

करीला मेले में आज से मचेगी राई नृत्य की धूम, मन्नत पूरी होने पर आप भी करा सकते हैं ये नृत्य

अशोकनगर. मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में आज से तीन दिवसीय करीला मेले की शुरूआत हो चुकी है, श्रद्धालुओं का मानना है कि माता सीता के दरबार में हाजरी लगाने से हर मनोकामना पूरी होती है, यही कारण है यहां देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने पर यहां राई नृत्य करवाते हैं, इस कारण तीन दिनों तक जहां एक तरफ माता के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, वहीं दूसरी और राई नृत्य करती महिलाएं भी आकर्षण का केंद्र होता है।

कहा जाता है कि भगवान राम से वियोग होने के बाद सीता माता ने पूरा समय यहीं गुजारा था, यही कारण है कि यहां भगवान राम के बगैर ही अकेली सीता माता की प्रतिमा है, ऐसी प्रतिमा देशभर में और कहीं नहीं है, यहीं लव-कुश का भी जन्म हुआ था, माता के दर्शन करने के लिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं, लोगों का मनना है कि माता के दर्शन मात्र से ही हर मनोकामना पूरी हो जाती है, इसके बाद जिनकी मनोकामना पूरी होती है, वे यहां राई नृत्य करवाते हैं।

हम बात कर रहे हैं करीला मेले की, ये मेला मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में करीला नामक स्थान पर लगता है, भगवान श्री राम द्वारा त्याग करने के बाद सीता माता ने यहीं अपना समय गुजारा था, यहीं पर लव-कुश का जन्म भी हुआ था, हर साल रंगपंचमी पर यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं, यहां जिन लोगों की मनोकामना पूरी होती है, वे करीला मेले में राई नृत्य करवाते हैं। यहां आयोजित होने वाले राई नृत्य को देखने के लिए भी दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं, क्योंकि यहां आस्था और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

ऐसे पहुंचे करीला मेला
आप भी माता जानकी दर्शन करने जाना चाहते तो आपको मध्यप्रदेश के अशोकनगर या विदिशा जिले में पहुंचना होगा, इन दोनों शहरों से करीला स्थान की दूरी काफी कम है, अशोकनगर शहर से करीला मां जानकी का मंदिर महज 35 किलोमीटर दूर है, वहीं विदिशा शहर से 80 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा आप गूगल मेप से भी माता जानकी मंदिर पहुंचने का आसान रास्ता सर्च कर पहुंच सकते हैं।

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