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रंगों से पहले हुई पैसों की बारिश, नोट गिनने के लिए लगाने पड़े दर्जनों लोग

रंगों की बारिश यानी होली से पहले माता के दरबार में पैसों की जमकर बारिश हुई, ऐसे में नोटों को गिनवाने के लिए प्रशासन को करीब पांच दर्जन लोगों की ड्यूटी लगानी पड़ी, तब जाकर कहीं नोटों की गिनती हो पाई।

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रंगों से पहले हुई पैसों की बारिश, नोट गिनने के लिए लगाने पड़े दर्जनों लोग

रंगों से पहले हुई पैसों की बारिश, नोट गिनने के लिए लगाने पड़े दर्जनों लोग

अशोकनगर. मध्यप्रदेश में रंगों की बारिश यानी होली से पहले माता के दरबार में पैसों की जमकर बारिश हुई, ऐसे में नोटों को गिनवाने के लिए प्रशासन को करीब पांच दर्जन लोगों की ड्यूटी लगानी पड़ी, तब जाकर कहीं नोटों की गिनती हो पाई। आपको बतादें कि यहां हर बार ऐसे ही धनवर्षा होती है, क्योंकि हम बात कर रहे हैं माता रानी के दरबार की, जहां हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में जब कोई विशेष अवसर हो तो यहां लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है।

रंगपंचमी मेले से पहले मां जानकी मंदिर की दानपेटियां खोली गईं, तो दानपेटियां से 4.45 लाख रुपए दान राशि निकली। दान राशि की गिनती के लिए 53 पटवारियों व चार राजस्व निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी और करीब साढ़े सात घंटे लगातार दानराशि की गिनती चली।


करीला में दानराशि की गिनती का काम सुबह साढ़े 10 बजे से शुरू हुआ और शाम छह बजे तक गिनती चली। दानपेटियों से 4 लाख 45 हजार 400 रुपए निकले, हालांकि सिक्कों की गिनती नहीं हो सकी, इससे यह राशि और बढऩे का अनुमान है। इससे पहले 21 जनवरी को दानराशि की गिनती हुई और 4.88 लाख रुपए दानराशि निकली थी, वहीं कुछ दानपेटियों की गिनती इससे 15 दिन पहले हो गई थी, जिसमें करीब को 6.85 लाख रुपए यानी जनवरी में 11.73 लाख रुपए दानराशि निकली थी। वहीं बड़ी संख्या में जले-कटे नोट भी दानपेटियों से निकले, इसके अलावा बिछूड़ी, पायल, कटोरी, चांदी के पैर, चांदी की आंखें, मंगलसूत्र, कंगन भी निकले। वहीं कई श्रद्धालुओं के मन्नत पत्र भी मिले।

हर साल 50 लाख रु.दान, जो हो जाता है मेले में खर्च
21 जनवरी को हुई दानराशि की गिनती के 43 दिन बाद मार्च में हुई गिनती में 4.45 लाख रुपए दानराशि मिली। यानी मंदिर में रोजाना करीब दस हजार रुपए से अधिक राशि का दान दानपेटियों में आ रहा है। सालभर में मां जानकी मंदिर करीला में 50 लाख रुपए से अधिक की राशि दान में आती है, लेकिन सालभर एकत्रित होने वाली यह दानराशि रंगपंचमी के मेले की तैयारियों पर खर्च हो जाती है। यहां तक कि मंदिर में दर्शन करने आने वाले वीआइपी को पानी की बोतल व चाय भी इसी दान राशि से उपलब्ध होती है।

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