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पत्तों की तरह टूट रही जलावर्धन की पाइप लाइन

पानी आने की खुशी से पहले सताने लगती है चिंता, कहीं फूट न जाए पाइप लाइन...

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अशोकनगर/शिवपुरी। सिंध का पानी मड़ीखेड़ा बांध से शिवपुरी शहर तक लाने के लिए डाली गई पाइप लाइन सूखे पत्तों की तरह टूट रही है। सिंध जलावर्धन योजना की निर्माण एजेंसी रही नगरपालिका के वर्तमान से लेकर पूर्व के दो नपाध्यक्ष व उनकी परिषद भी इसके लिए जिम्मेदार है, क्योंकि प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग न करने से दोशियान मनमानी करती रही।

नगरीय प्रशासन के सीई तक पाइप देखकर यह कह चुके कि 40 साल की नौकरी में ऐसे पाइपों से पानी जाते हुए देश के किसी कोने में नहीं देखा। शहर की ढाई लाख की आबादी पानी का इंतजार कर रही है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में टूटते आश्वासनों से अब जनता का विश्वास भी डगमगाने लगा है।

पिछले तीन माह से फूट रही लाइन को देखकर अब एकमात्र उपाय ही बचता है कि पाइप बदले जाएं। क्योंकि शहर की जनता को ग्वालियर बायपास तक पानी आने की जितनी खुशी होती है, उससे अधिक यह चिंता सताने लगती है कि न जाने अब कहां से फूट जाए पाइप लाइन...!

कैसे बने सामंजस्य
योजना का काम कर रही कंपनी व नगरपालिका के बीच सामंजस्य की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोशियान के जीएम महेश मिश्रा सतनबाड़ा थाने में नपाध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह व उपाध्यक्ष सहित कई कांग्रेस नेताओं पर प्रकरण दर्ज करा चुके हैं।

यही वजह है कि मिश्रा फूटी पाइप लाइन को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं, तो वहीं मुन्ना के मुखबिर हर टूट-फूट की सूचना तत्काल दे रहे हैं। निर्माण एजेंसी व कंपनी के बीच ऐसे हालातों में काम कैसे होगा..?।

लॉ-स्टूडेंट असमंजस में
लॉ स्टूडेंट अभय जैन ने जब जलावर्धन प्रोजेक्ट का एग्रीमेंट निकलवाया तो उसे देखकर अभय ने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी से यह कह सकता हूं कि अंगे्रजी के उस एग्रीमेंट को नपा में न तो किसी ने पढ़ा और न किसी ने समझा।

प्रोजेक्ट का अपडेट
गुरुवार की दोपहर 12 बजे पानी बायपास पर आया और 40 टैंकर ही भर पाए थे कि खूबत घाटी के नीचे की ओर पाइप लाइन फूट गई। सप्लाई ठप हो गई और दोशियान के जिम्मेदार फूटे पाइप को सुधारने में जुट गए।


ऐसे समझें जलावर्धन की कहानी
वर्ष 2009 में इस प्रोजेक्ट का जब एग्रीमेंट हुआ, तब नपाध्यक्ष जगमोहन सिंह सेंगर तथा सीएमओ रामनिवास शर्मा, जबकि एई के पद पर जेपी पारा पदस्थ रहे। दोशियान कंपनी ने नपा के जिम्मेदारों को हवाई यात्रा करवा कर अहमदाबाद बुलवाया।

कंपनी ने पूरा एग्रीमेंट अंगे्रजी में टाइप करवाया, जिसे पढऩा व समझना नपा के उक्त जिम्मेदारों के बस की बात नहीं थी। इसलिए एग्रीमेंट पर बिना रुके हस्ताक्षर होते रहे और कागज के नक्शे पर जो समझाया, उसी आधार पर काम शुरू कर दिया गया। यह प्रोजेक्ट का पहला चरण था।


कुछ समय बाद नपाध्यक्ष की कमान रिशिका अनुराग अष्ठाना ने संभाली। शिवपुरी में जलावर्धन का काम करने दोशियान ने हीरेन मकवाना को प्रोजेक्ट मैनेजर नियुक्त किया, जबकि नपा की ओर से केएम गुप्ता (पीएचईसे नपा में अटैच) प्रभारी रहे।

मकवाना-गुप्ता की जुगलबंदी के कई किस्से शहर में चर्चित हैं। जब पाइप लाइन डालने का काम चल रहा था, तब नपा के कुछ जनप्रतिनिधि व जागरुक लोगों ने कहा भी था कि पाइप के नीचे रेत नहीं डाली जा रही, लेकिन नपा के प्रोजेक्ट प्रभारी यह कहकर पर्देदारी करते रहे कि 25 साल तक पानी देने की जिम्मेदारी कंपनी की है।

यह सुनकर विरोध करने वाले भी शांत हो गए। इस दौरान प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग करने की बजाए नपा के जिम्मेदारों ने चेक काटने में अधिक दिलचस्पी दिखाई, क्योंकि सभी का कमीशन सेट था।

फिर आई मुन्नालाल कुशवाह की परिषद, तो दूसरी ओर से भाजपा की विधायक व प्रदेश की मंत्री ने प्रोजेक्ट की कमान संभाली। इस बीच दोशियान से हीरेन मकवाना की रवानगी हो गई तथा उनकी जगह महेश मिश्रा आ गए। बताया तो यहां तक जाता है कि जो काम पिछले डेढ़ साल में हुए, उनमें से कई कामों का भुगतान तो पूर्व परिषद के समय ही हो गया।

इस परिषद के समय में मड़ीखेड़ा बांध पर इंटेकवेल के पास पंप स्टेशन व मोटर पंप लगाए गए। मंत्री ने पिछले वर्ष से लेकर अभी तक तपती दोपहरी में जहां मड़ीखेड़ा के दर्जनों चक्कर लगाए, वहीं नपाध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह भी कभी पाइप के ऊपर तो कभी फूटे पाइप को निहारते नजर आए। 9 साल में सिर्फ चार बार सिंध का पानी शिवपुरी शहर तक आ सका तथा वर्तमान में लाइन फूटी पड़ी है।


यह हो तो बने बात
पाइप लाइन में हो रही टूट-फूट सुधारते हुए ग्वालियर बायपास हाईड्रेंट तक पानी आता रहे, तो वहां से भरे जाने वाले टैंकरों से जल्दी सप्लाई हो पाएगी, क्योंकि वहां टैंकर जल्दी भर रहे हैं।

साथ ही गांधी पार्क व करौंदी संपबैल सहित मनियर टोल टैक्स की टंकी को जोड़ दिया जाए, तो आने वाले प्रेशर से टंकियों में भी पानी पहुंचता रहेगा। जब भी टंकी भरेगी, क्षेत्र के लोगों को नलों में पानी मिल जाएगा। यभविष्य में पाइप तो बदलने ही पड़ेंगे।


शिवपुरी का जलावर्धन प्रोजेक्ट पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। पाइप लाइन में रेत का बेड बनाने की बजाए कोपरा व पत्थरों में घटिया क्वालिटी के पाइप डाल दिए। मैंने तो लाइन डलते समय भी विरोध किया, लेकिन कमीशनखोरी में उलझे लोगों ने कोई एक्शन नहीं लिया।
अनिल शर्मा (अन्नी), उपाध्यक्ष नपा शिवपुरी