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negligence of Governance: भू-जल रिचार्ज करने गांव में बन रहे अमृत सरोवर, शहर में 46 कुए डस्टबिन में तब्दील

यह कैसी अनदेखी:भू-जल को रिचार्ज करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं कुएए फिर भी जारी अनदेखी।-इन कुओं को साफ नहीं कराया तो प्रदूषित हो जाएगा भू-जल, प्रशासन को दिखाना चाहिए गंभीरता।

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negligence of administration: भू-जल रिचार्ज करने गांव में बन रहे अमृत सरोवर, शहर में 46 कुए डस्टबिन में तब्दील

negligence of administration: भू-जल रिचार्ज करने गांव में बन रहे अमृत सरोवर, शहर में 46 कुए डस्टबिन में तब्दील


अशोकनगर. बारिश के पानी को सहेजकर भू-जल को रीचार्ज करने ग्रामीण क्षेत्र में तो साढ़े 12 करोड़ रुपए की लागत से 107 अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं, लेकिन शहर में 46 शासकीय कुए डस्टबिन में तब्दील हो गए हैं। जबकि कुआ भी भू-जल को रीचार्ज करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। लेकिन यदि रहते कचरे के ढेरों को हटाकर साफ नहीं किया गया, तो यह कुए भू.जल प्रदूषित करने का कारण बनेंगे।
शहर में नपा के 46 कुआ हैं, जो पहले शहर की प्यास बुझाते थे लेकिन अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इन कुओं की जरूरत खत्म हुई तो नपा ने दुर्घटना की आशंका को देख ज्यादातर कुओं पर लोहे की जालियां लगा दीं, लेकिन लोगों ने इन्हें कचरा फैंकने का स्थान बना लिया। अब स्थिति यह हो गई है कि शहर के यह शासकीय कुए पूरी तरह से कचरे से लबालब हो चुके हैं। तो वहीं कुछ कुओं में पानी है लेकिन कचरे का ढेर लग जाने से कचरा पानी मे ही सढ़ रहा है। इससे बदबू की समस्या बढ़ गई है तो वहीं शहर मच्छर-मक्खियों की भी भरमार हो गई है। स्थिति यह है कि शहर में कई जगहों को कुओं के नामसे पहचाना जाता है, लेकिन वहाँ कुओं की जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं और इससे कुओं का सिर्फ नाम ही शेष रह गया है।
एक्सपर्ट व्यू: भू-जल के प्रदूषण का कारण बन सकते हैं यह कुए
ड्रिंकिंग वाटर लैब केमिस्ट गौरव शर्मा के मुताबिक कुआ भू-जल को रिचार्ज भी करते हैं, जो बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाते हैं। यदि कोई कुआ पूरी तरह से कचरे से भर गया है और उसमें बारिश या नाली के पानी भरता है तो पानी जमीन में जाएगा और पानी के साथ सढ़कर कचरा भी जमीन में पहुंचेगा, इससे कुछ वर्षों बाद कचरे से भरे कुए भू-जल की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकते हैंए यदि हार्मफु ल कचरा इन कुओं में है तो यह भू-जल को प्रदूषित करेंगे। भू-जल की गुणवत्ता को प्रभावित होने से रोकने के लिए ऐसे कुओं की सफाई कराया जाना चाहिए।
इन तीन मामलों से जानें शहर में शासकीय कुओं के हाल
1- डस्टबिन बना 100 साल पुराना कुआ, आने लगी सढ़ांध
पाराशर मोहल्ला स्थित करीब 100 साल पुराने कुआ गंदगी से डस्टबिन में तब्दील हो गया है। जिससे सढांध आने लगी है और कुए से कीड़े निकल रहे हैं। रहवासी हरिओम शर्मा ने बताया कि 100 साल पुराना यह कुआ है और वर्षों पहले रहवासियों की मांग पर नपा ने कुए में जाली लगवाई थी। इसके बाद लोगों ने कचरा डालना शुरू कर दिया और कुआ अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गया है।
2- कचरे के ढेर में तब्दील कुआ, पॉलीथिन की भरमार-
पुराना बाजार स्थित चौपड़ा कुआ, जो अब गायब होने की स्थिति में है और कचरे का ढ़ेर लगा हुआ है। साथ ही कुए में पॉलीथिन की भी भरमार है। लोगों द्वारा कुए में ही कचरा फैंका जा रहा है, इससे कचरे का ढेर लग गया है। लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में पानी भरने से कचरा सढ़कर बदबू का कारण बनता है, इससे हमेशा यहां मक्खियां भरी रहती हैं और मच्छर भी परेशानी बनते हैं।
3-कुए में भरा जा रहा है मलबा, खत्म होने की कगार पर
शहर के गौशाला क्षेत्र में वर्धमान स्कूल के पास स्थित शासकीय कुआ भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। हालत यह है कि देखरेख के अभाव में यह कुआ खत्म होने की कगार पर है और जाली व मुडेर भी टूट चुकी है। साथ ही मकानों व निर्माण सामग्री का मलबा भी इसी कुए में फेंका जा रहा है। लेकिन जानकारी होने के बावजूद भी इस पर न तो नपा का कोई ध्यान है और न जिम्मेदार ध्यान दे रहे।