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ईमानदार की तो बात ही नहीं, हम बेईमानों में से कम बेईमान ढूंढ रहे हैं

पत्रिका के टॉक शो में बोले लोग, पत्रिका एप डाउनलोड कर चेंजमेकर अभियान से जुड़े

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अशोकनगर। चेंजमेकर बनने के लिए जिले के लोग उत्साहित हैं। पत्रिका के इस अभियान को खूब सराहना मिल रही है और लोगों ने इसे सकारात्मक बताया है। राजनीति के शुद्धिकरण के इस अभियान में युवाओं की सहभागिता नया दौर लेकर आएगी।

जिला मुख्यालय पर पत्रिका के चेंजमेकर अभियान को लेकर शुक्रवार को ब्यूरो ऑफिस में टॉक शो का आयोजन किया गया। इसमें समाजसेवी व व्यापारी वर्ग ने हिस्सा लिया। पत्रिका के अभियान की सराहना करते हुए लोगों ने पत्रिका एप डाउन लोड किया और नामांकन फार्म भरा।
टॉक शो के दौरान लोगों ने कहा कि वर्तमान राजनीति इतनी दूषित हो चुकी है कि ईमानदार राजनेता की तो बात ही नहीं बची। हम बेईमानों से कम बेईमान को ढूंढने की कोशिश करते हैं। राजनीतिक दलों का सिस्टम ऊपर से ही दूषित है। चुनावों में धन बल व बाहुबल का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। आपराधिक प्रवृति के लोग चुनाव लड़ रहे हैं और जाति, भाषा व क्षेत्रवाद राजनीति पर हावी है। एक बेहतर और ईमानदार राजनीति में ये सबसे बड़े बाधक हैं। इस दौरान लोगों ने अपने सुझाव भी दिए और वर्तमान सरकारों की अलोचना भी की।

ये बोले लोग
ईमानदार राजनेता तो आज ढूंढे से नहीं मिलते। जो आदमी पहले टिकट लेने और फिर चुनाव जीतने में करोड़ों रुपए खर्च करता है, उससे ईमानदार सेवा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। राजनीतिक दलों को भी अपने कर्तव्य का निर्वहन करना होगा। ऊपर से ही उनका सिस्टम खराब हो चुका है।

धर्मेन्द्र रघुवंशी, रघुवंशी युवा संघ।
पत्रिका की चेंजमेकर मुहिम सराहनीय है। इसके लिए मैं पत्रिका को बधाई देना चाहूंगा। राजनीति में अच्छे और ईमानदार लोगों का आना जरूरी है। चेंजमेकर अभियान से जुड़कर युवा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वर्तमान सरकार की नीतियों ने सबसे अधिक व्यापारियों को प्रभावित किया है।

राजेश पालीवाल, गल्ला व्यापारी।
गुलाब कोठारी हमेशा एक नया विषय चुनते हैं। हाल ही में काला कानून के विरुद्ध पत्रिका की जीत हुई है। उन्होंने जो भी अभियान छेड़ा है, उसे सफल बनाया है। इस तरह के अभियान होना चाहिए। देश पर असर डालने वाले बड़े फैसलों की जानकारी जनता को छह माह पहले से देनी चाहिए।

विनोद सोनी, सर्राफा व्यापारी।
बड़ी पार्टियों ने ही राजनीति को अशुद्ध किया है।जात-पात, क्षेत्र और भाषा के आधार पर राजनीति हो रही है।राजनीति का ईमानदारी से संबंध ही खत्म हो गया है। उस पर सरकारों के फैसलों ने व्यापारी, किसान, युवा सभी को परेशान किया है।जीएसटी और नोटबंदी से व्यापार आज भी नहीं उबर पाए।

महावीर जैन, अनाज व्यापारी।
चेंजमेकर मुहिम सराहनीय है। इसके लिए युवाओं को आगे आना चाहिए।युवाओं का जागरुक होकर राजनीति में सक्रिय होना आज के समय में आवश्यक है।लगातार बढ़ती बेरोजगारी युवाओं के लिए सबसे अधिक घातक है।छोटी सी नौकरी में भी लाखों आवेदन पहुंच रहे हैं।

कुमार संभव, अक्षर पीठ संस्था।
पहली बार किसी अखबार ने राजनीति में सुधार के लिए कदम बढ़ाया है।इसके लिए पत्रिका का आभार। जो लोग नियम कानून बना रहे हैं, वे ही उन पर नहीं चल रहे।सरकार के कार्यक्रमों का क्रियान्वयन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। हम आज अच्छा-बुरा और पाप-पुण्य भूल गए हैं।

भूपेन्द्रसिंह रघुवंशी, ऊॅ मार्गदर्शी समिति।
ऐसा लगता हैकि आज सरकारें जनता के प्रति उत्तरदायी नहीं है।ऐसी सरकारों को उखाड़ फेंकना चाहिए।राइट टू रीकॉल लागू हो तो सरकारें अधिक जवाबदेह हो सकती हैं।जनप्रतिनिधि बनते ही नेताओं की संपत्ति दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती है।लेकिन सवाल पूछने वाला कोईनहीं है।

घनश्याम नायक, समाजसेवी।
पार्टी के लिए काम करने वाला कार्यकर्ता उससे कुछ न कुछ चाहता हैऔर जैसे ही उसका विधायक या सांसद बनता हैतो वह अपने नाजायज काम करवाने का प्रयास करता है।विदेशों की तरह यहां भी कार्यकर्ताओं की तनख्वाह होनी चाहिए। ताकि वह बाद में अपने नाजायज काम लेकर न आए।