
असोकनगर. जिले के नईसराय-ईसागढ़ इलाके में रेत खदानों से निकाली जाने वाली काली रेत का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। रेत खदानों की नीलामी के बाद विभिन्न रेत खदानों से रेत का खनन और परिवहन शुरू हुआ था, लेकिन कुछ समय बाद ही रेत का कारोबार रायल्टी के फेर में उलझ गया और रेत परिवहन कर रहे वाहनों के पहिए महज एक महीने में ही थम गए। हालांकि, प्रशासन की सख्ती के बाद दिन में तो काली रेत का कारोबार रूका, लेकिन रेत माफियाओं ने दिन के स्थान पर रात में कारोबार शुरू कर दिया। आलम यह है कि प्रशासन की सख्ती के बावजूद नईसराय तहसील के अखाईघाट और सोहपुर के पास स्थित सिंध नदी के खदानों पर सूरज ढलते ही रेत का काला कारोबार शुरू हो जाता है।
नईसराय तहसील से सिंध और छोछ नदी निकलती हैं। इन दोनों नदियों में गिनी चुनी ही खदानें रेत के लिए नीलाम की जाती है। लेकिन खनिज माफिया दर्जनों स्थानों से अवैध रूप से रेत निकालकर उसका परिवहन करते हैं। सिंध नदी पर सोहपुर और अखाईघाट, जबकि छोछ नदी पर देपालखेड़ी गांव के पास ही रेत की खदानें हैं। बावजूद इसके खनिज माफिया कांकड़ा, बेरखेड़ी, खानपुर, लहरघाट, भैंसा, अखाईघाट और छोछ नदी से अमरौद, सिंगराना, रूसल्ला बुजुर्ग, देपालखेड़ी सहित अन्य कई स्थानों पर रेत का खनन करते हैं। इसके अलावा ईसागढ़ में भी यूपी की सीमा से सटी महुअर नदी से भसुआ और अन्य स्थानों से रेत पहुंचती है।
रायल्टी के फेर में बंद हो गया रेत परिवहन
कुछ महीने पहले जिले की सभी रेत खदानों की नीलामी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी। रेत खदानों का आधिपथ्य कुरवाई के सितेन्द्र घनघोरिया ने 2 करोड़ 75 लाख रूपए में लिया है। एजेंसी को रेत खनन और परिवहन की अनुमति भी मिल चुकी थी। साथ ही रेत खदानों का सीमांकन किया जाकर रेत का कारोबार भी शुरू किया जा चुका था। सूत्रों की मानें तो खदानों के ठेकेदार ने नईसराय, महिदपुर सहित अन्य कई गांवों के चार-पांच लोगों को पेटी पर सिंध और छोछ नदी की रेत खदानें पेटी पर दे दीं। इन युवाओं ने रॉयल्टी के नाम पर पांच-सौ सात सौं की फर्जी रसीद काटकर रेत का कारोबार भी शुरू कर दिया। यह मामला प्रशासन की जानकारी में आया तो उन्होंने फौरन रेत खनन और परिवहन पर रोक लगा दी।
अब रात के अंधेरे में हो रहा है परिवहन
प्रशासन द्वारा दिन में सख्ती बरती जाने से खनन माफिया अब रात में काली रेत का काला कारोबार कर रहे हैं। जब अखाईघाट रेत खदान से रेत परिवहन की जानकारी लगी तो वहां शाम ७ बजे मौके पर आधा दर्जन से भी ज्यादा ट्रैक्टर रेत परिवहन में व्यस्त दिखे। मीडिया टीम को देख कुछ लोग रेत की आधी अधूरी ट्राली भरकर गंतव्य की ओर रवाना हो गए। रेत खदान से रात लगभग 9 बजे लौटते समय भी कई ट्रैक्टर-ट्राली रेत भरने जाते रहे, जबकि कई ट्रैक्टर रेत भरकर नईसराय की ओर आ रहे थे।
16 लाख का घाटा सहन कर समेट लिया बोरिया बिस्तर
रेत खदानों के मुख्य ठेकेदार से जिन युवाओं ने पेटी पर रेत खदानें लेकर रेत का कारोबार किया था, उन युवाओं को एक महीने में 16 लाख रुपए से भी ज्यादा का घाटा उठाना पड़ा। नाम नहीं छापने की शर्त पर पेटी पर काम कर रहे एक युवक ने बताया कि एक महीने के लिए सिंध और छोछ नदी के विभिन्न रेत खदानों पर पांच दर्जन से भी ज्यादा लड़के नियुक्त किए गए थे। इसके अलावा अन्य तमाम तरह के खर्चे मिलाकर उन्होंने 21 से 22 लाख रुपए खर्च किए, जबकि आमदनी महज 6 लाख ही हो सकी। पेटी ठेकेदारों की मानें तो विभाग द्वारा प्रति घन मीटर रेत उठाव पर ढाई हजार से भी ज्यादा रायल्टी तय की है। ऐसे में एक ट्राली रेत की रायल्टी ही आठ हजार रुपए के करीब पहुंच जाती है। यही कारण है कि जिले में विधि अनुसार रेत का कारोबार संभव नजर नहीं आ रहा है।
Published on:
21 Feb 2021 08:32 am
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