
paryushan festival
अशोकनगर. सरलता का नाम ही आर्जव है। दिगबंर मुनि का और बालक का ह्रदय सरल होता है। सरल ह्रदय में सत्य और विश्वास का निवास होता है। जब पालक भी बालक की तरह सरल होता है, तब वह जग पालक होता है। उक्त उदगार निर्माणाधीन दिगबंर जैन मंदिर ईसागढ़ रोड पर धर्मसभा में उत्तम आर्जव धर्म का महत्व बताते हुए मुनि सुदत्तसागर महाराज ने व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि सरलता योग्यता प्रदान करती है। योग्यता अर्थ और परमार्थ में सफलता प्रदान करती है। सरलता सज्जनों का गुण है। मन का मैल निकलने से ह्रदय सरल और निर्मल होता है। सरल और निर्मल व्यक्ति समाज का दर्पण होता है। दर्पण के समान व्यक्ति ही समाज की कालिख को दिखा सकता है और वही समाज के बिखरे हुए मोतियों को पिरोकर माला बनाने वाला सुई धागा हो सकता है। जहां कुटिलता मायाचारी होती है, वहां रत्नत्रय एवं उत्तम क्षमादि दशलक्षण की माला टूट जाती है।
मायाचारी बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और होता है
मुनि सुदत्तसागर ने बताया कि सरलता भगवान के द्वार में प्रवेश करने का साधन है। जैसे सांप अपने बिल में सीधा प्रवेश करता है, वैसे ही परमात्मा के द्वार में प्रवेश पाने हेतु सरल होना आवश्यक है। मायाचारी मुख में राम बगल में छुरी वाली कहावत को चरितार्थ करता है। मायाचारी बगुले के समान बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और होता है। मायाचारी विश्वासघात करता है। मनवचन काय को छल प्रपंच से बचाना सीधा सच्च और अच्छा सोचना, बोलना और करना, न्याय नीति से धन अर्जन करना, कुटिलता से बचना और ईमानदारी से कर्तव्यों का पालन करना ही आर्जव धर्म है।
Published on:
01 Sept 2022 09:18 pm
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