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मतदान के दो दिन पहले स्कूल से भगाया अब टूटे घर में रहने मजबूर परिवार, हवा में झूल रही छत

बेवसी की तीन तस्वीर: कभी थे खुद के पक्के मकान, अब मौत के मुंह में रहने को मजबूर हैं परिवार।

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मतदान के दो दिन पहले स्कूल से भगाया अब टूटे घर में रहने मजबूर परिवार, हवा में झूल रही छत

अशोकनगर. खुद के पक्के और सुरक्षित मकानों में रहने वाले परिवार आज इतने बेवस हो चुके हैं कि उन्हें टूटे हुए घरों और हवा में झूलती छतों के बीच रात गुजारना पड़ रही है। बेवसी भी ऐसी कि हवा में झूलती छत और जर्जर दीवारों से सिर पर हमेशा मौत मंडराने का डर होने के बावजूद भी वह ऐसी जगहों पर रहने के लिए मजबूर हैं।


बेवसी की यह तस्वीरें जिले के राजपुर कस्बे की है। गंगाराम साहू का दो मंजिला मकान अतिक्रमण के दायरे में आने से प्रशासन ने तोड़ दिया। इससे गंगाराम साहू तो पास में बनी घास-पूस की पुरानी यज्ञशाला में रह रहा है, वहीं बेटा-बहू छोटे बच्चों के साथ प्रशासन के कहने पर कस्बे के स्कूल में रह रहे थे। लेकिन मतदान होने से उन्हें स्कूल से भगा दिया गया। इससे अब गंगाराम साहू के बेटा-बहू छोटे बच्चों के साथ अपने टूटे हुए घर में रहने को मजबूर हैं। घर का करीब 60 फीसदी हिस्सा तो बचा ही नहीं और दीवारें भी नहीं हैं।

वहीं छत भी हवा में झूल रही है, लेकिन इस परिवार को सिर पर मंडराती मौत के बीच इस घर में रहकर रात गुजारना पड़ रही है। यह सिर्फ एक परिवार की बात नहीं, बल्कि स्कूल से भगाए जाने के बाद इसी तरह से अन्य परिवार भी टूटे घरों के मलबे में जगह-जगह निकले सरियों के बीच रहने को मजबूर हैं।


अतिक्रमण में बने 54 मकानों के परिवारों की यही कहानी-
कस्बे की सरकारी पठार पर बने वर्षों पुराने इन मकानों को एक याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने अतिक्रमण माना और प्रशासन को इन मकानों को हटाने का आदेश दिया था। इससे प्रशासन ने 23 मकानों को तोड़ दिया, वहीं 31 मार्च को शेष 31 मकानों को जेसीबी और पोकलेन मशीनों से तोड़ दिया। बेघर हो जाने से इन परिवारों की प्रशासन ने कस्बे के सरकारी स्कूल और छात्रावास में रहने की व्यवस्था कर दी थी, लेकिन लोकसभा चुनाव का मतदान होने से मतदान के दो दिन पहले इन परिवारों को स्कूल ने भगा दिया है।