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अशोकनगर जेल में बंद कैदी की मौत, परिजनों ने लगाए कई आरोप

- पुलिस कहती रही हमने समय पर पहुंचा दी थी सूचना- इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गई थी पुलिस

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मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिला जेल में दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे एक 29 वर्षीय आरोपी की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। सामने आ रही जानकारी के अनुसार अचानक बिगड़ी तबियत के चलते इसे जिला अस्पताल लाया गया लेकिन यहां कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। मृतक की तबियत सोमवार शाम को बिगड़ी थी उसके बाद ही इसे अस्पताल लाया गया था।

बहादुरपुर का रहने वाला यह 29 वर्षीय दुष्कर्म का आरोपी पॉस्को एक्ट के मामले में अशोकनगर जिला जेल में बंद था। वहीं मृतक के परिवार के लोगों का कहना है कि करीब 4 माह से उसकी तबियत खराब चल रही थी। इसके अलावा समय पर सूचना नहीं दिए जाने के परिजनों के आरोप पर जेल पुलिस का कहना है कि आरोपी हरिओम की मौत होते ही बहादुरपुर थाना प्रभारी को यह सूचना लेकर तुरंत उसके घर भेज दिया था।

परिजनों के अनुसार जब वह हरिओम से मिलने शनिवार को जेल आए थे तब उनसे बीमारी के चलते उसे ग्वालियर रेफर करने की बात कही गई थी। लेकिन इसके बावजूद उसे ग्वालियर रेफर नहीं किए जाने की लापरवाही के चलते उसकी मौत हो गई। इसके अलावा मृतक के परिजन मृतक के पोस्टमार्टम के पहले से की दोपहर करीब साढ़े बारह बजे तक पुलिस पर तरह-तरह के आरोप लगाते रहे। ऐसे में मृतक का पोस्टमार्टम नहीं किया जा सका।

पत्नी को 1.30 लाख नहीं दे पाने वाले की भी पहले यहां हो चुकी है संदिग्ध मौत
इससे पहले भी अशोक नगर जिला जेल में गुना गुलाबगंज निवासी 36 वर्षीय मुकेश पुत्र लालाराम अहिरवार की संदिग्ध मौत हो चुकी है। साल 2022 में मुकेश बैरक में गिर पड़ा था, जिसके बाद उसे तुरंत ही बैरक से बाहर निकालकर जेल प्रबंधन ने इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां पर उसकी मौत हो गई थी। जिसका तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया।

उस समय जेलर का कहना था कि आठ माह से उसे कोई दिक्कत नहीं थी, कभी तबीयत खराब भी नहीं हुई,लेकिन परिजन कम ही मिलने आते थे, इससे वह मानसिक रूप से परेशान रहता था। जेलर के मुताबिक परिजनों ने बताया थ्रर कि जेल में आने से पहले उसे दो बार पहले अटैक आ चुका था, लेकिन परिजनों ने जेल प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं दी।

दरअसल मुकेश अहिरवार की शादी करीब 9 साल पहले हुई थी और तभी से उसकी पत्नी अलग रह रही थी, जिसने भरण-पोषण का केस दायर किया था। लेकिन मुकेश अपनी पत्नी को भरण-पोषण की 1.30 लाख रुपए राशि नहीं दे पाया था, तो कोर्ट ने एक महीने की मोहलत दी, लेकिन पैसे नहीं दिए तो उसे इस शर्त पर जेल भेज दिया था कि पैसे भर देने पर उसकी रिहाई कर दी जाए।