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नेता नहीं मोक्ष मार्ग पर चलने के योग्य बनें

उक्त उपदेश आर्यिका अनंतमति माताजी की शिष्या आर्यिकाश्री निर्मलमति माताजी ने बुधवार को स्थानीय पाश्र्वनाथ मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिए।

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Bhalendra Malhotra

Jan 21, 2016


अशोकनगर/शाढ़ौरा। हम गायक अर्थात् गाने वाले नहीं बल्कि ज्ञायक अर्थात् जानने देखने वाले बनें। नायक अर्थात् नेता नहीं बल्कि लायक अर्थात् मोक्ष मार्ग पर चलने के योग्य बनें। यदि मोक्ष मंजिल प्राप्त करना है और भगवान बनना है तो सभी संकल्प विकल्पों से रहित होना होगा अर्थात् निर्विकल्प अवस्था को प्राप्त करना होगा। उक्त उपदेश आर्यिका अनंतमति माताजी की शिष्या आर्यिकाश्री निर्मलमति माताजी ने बुधवार को स्थानीय पाश्र्वनाथ मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिए।

उन्होंने कहा कि संसार के सभी पदार्थ हमारे साथ जाने वाले नहीं हैं जो सभी हम अपने शरीर के लिए इक_ा कर रहे हैं। सोचें जब शरीर ही हमारे साथ जाने वाला नहीं है तो ये वस्तुएं हमारे साथ कैसे जाएंगी? केवल हमारी आत्म दृष्टि मात्र ही हमारे साथ जाने वाली है। माताजी ने कहा कि हमने पुरुषार्थ करके आधी यात्रा तो तय कर ली है अर्थात् 14 राजु प्रमाण के इस लोक में हम 7 राजु प्रमाण तक यानी मध्य लोक तक आ गए हैं पर यदि अभी हम नहीं चेते तो पुन: नीचे की ओर जाना पड़ेगा।

इस संसार में पर पदार्थों का संयोग और वियोग होता रहता है लेकिन हमें इन सभी परिस्थितियों में समता भाव रखना चाहिए तभी हम कर्म बंध से बच सकते हैं। यदि हमें भगवत स्वरूप की प्राप्ति करना है तो ज्ञेय ज्ञायक सम्बन्ध बनाना होगा अर्थात् हम पर पदार्थों के केवल ज्ञाता बनें, उन्हें जानें पर उनके कर्ता व भोक्ता नहीं बनें।