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2.04 crore case: योजना अधिकारी को हटाया व राशि आहरण पर लगाई रोक

कलेक्टर की कार्रवाई: जनभागीदारी राशि वितरण में बड़ी
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अशोकनगर

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Manoj Vishwkarma

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Updated: 7 May 2022, 11:42 PM IST

2.04 crore case: योजना अधिकारी को हटाया व राशि आहरण पर लगाई रोक

2.04 crore case: योजना अधिकारी को हटाया व राशि आहरण पर लगाई रोक

अशोकनगर. जनभागीदारी राशि वितरण में जिले में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कलेक्टर को सूचना दिए बिना ही मनमाने तरीके से 15 पंचायतों को 2.04 करोड़ रुपए की राशि भेज दी है। इस पर कलेक्टर ने जिला योजना अधिकारी को हटा दिया है, साथ ही पंचायतों के राशि आहरण पर भी सख्ती से रोक लगा दी है। साथ ही पंचायतों को चेतावनी दी है कि बिना अनुमति राशि निकाली तो अमानत में ख्यानत का प्रकरण दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दो साल पहले जिले की 15 ग्राम पंचायतों को जनभागीदारी के तहत 22 निर्माण कार्य स्वीकृत हुए थे। इनमें 15 ग्रेबल रोड निर्माण, छह तालाब गहरीकरण, जीर्णोद्धार और एक चनखारी खरंजा का निर्माण शामिल है। दो किस्तों में दो करोड़ चार लाख 24 हजार 250 रुपए राशि जारी होना थी। उस समय पांच पंचायतों को पांच कार्यों की पहली किस्त जारी की गई थी, निर्माण की जांच करने के बाद दूसरी किस्त जारी होना थी, लेकिन बिना जांच व कलेक्टर को सूचना दिए बिना ही सभी 22 कार्यों की दूसरी किस्त जारी कर दी गई। गड़बड़ी पाते हुए कलेक्टर आर उमा महेश्वरी ने बीएस वसुनिया को जिला योजना अधिकारी के प्रभार से मुक्त कर डिप्टी कलेक्टर विजय यादव को प्रभार दे दिया। साथ ही पंचायतों को इस राशि आहरण पर रोक लगा दी है।


गड़बड़ी मिली तो लेने व देने वाले पर कार्रवाई

अचानक ग्राम पंचायतों को राशि जारी किए जाने पर कलेक्टर अब मामले की जांच कराएंगी। इसके लिए सभी 22 कार्यों की मौके पर जांच होगी और जांच के लिए ब्लॉकस्तरीय टीम बनाई जा रही है। कलेक्टर का कहना है कि यदि जांच के दौरान गड़बड़ी पाई गई तो राशि जारी करने वाले व लेने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जिन्हें पहली नहीं, उन्हें दूसरी किस्त में ही पूरी राशि दी

खास बात यह है कि पहले पांच पंचायतों को पांच कार्यों के लिए पहली किस्त जारी की गई थी और 17 कार्यों की पहली किस्त भी जारी नहीं हुई थी। लेकिन अब अचानक जिला योजना कार्यालय ने उन पंचायतों को भी दूसरी किस्त में पूरी राशि जारी कर दी, जिन्हें पहली किस्त ही जारी नहीं हुई थी। इससे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या कारण था जो जिला योजना कार्यालय ने कलेक्टर की बिना अनुमति या कलेक्टर को सूचना दिए बिना ही जल्दबाजी में पूरी राशि जारी कर दी।

इनका कहना है

बिना जांच कराए और बिना सूचना दिए ही दो करोड़ से अधिक की राशि जारी कर दी गई, साथ ही अन्य शिकायतें भी मिली हैं। इससे जिला योजना अधिकारी का प्रभार बदला गया है, वहीं राशि आहरण पर रोक लगाई है। अब निर्माण कार्यों व अन्य मामलों की जांच की जाएगी, गड़बड़ी पाए जाने पर राशि जारी करने वाले व राशि लेने वाले पर कार्रवाई की जाएगी।

आर उमा महेश्वरी, कलेक्टर