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रजत विमान में विराजमान कर श्रीजी को कराया नगर भ्रमण

-कचनार में निकाली भगवान आदिनाथ की शोभायात्रा, रंगोली व तोरण द्वारों से सजाया नगर, दिव्यघोष रहा आकर्षण का केन्द्र

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रजत विमान में विराजमान कर श्रीजी को कराया नगर भ्रमण

रजत विमान में विराजमान कर श्रीजी को कराया नगर भ्रमण

अशोकनगर. भगवान आदिनाथ को रजत विमान में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। इस दौरान कचनार नगर में जुलूस निकलने वाले रास्ते को रंगोली व तोरण द्वारों से सजाया गया। जगह-जगह श्रीजी की आरती उतारकर श्रीफल भेंट किए गए।


जुलूस का शुभारंभ कचनार के पारसनाथ जैन मंदिर से हुआ जो प्रमुख मार्गों से होते हुए चौधरी के बगीचे में पहुंचकर धर्मसभा में बदल गया। शोभायात्रा में श्रद्धालु नाचते गाते हुए चल रहे थे। महिलाएं भजन गाते हुए चल रहीं थी वहीं राजपुर से आए सेवा दल के सदस्य दिव्यघोष की आकर्षक प्रस्तुति देते हुए जयकारे लगाते हुए चल रहे थे जो शोभायात्रा में आकर्षण का केन्द्र रहे।


जुलूस चौधरी के बगीचा में पहुंचा जहां भगवान के कलशाभिषेक, शांतिधारा की गई तथा फूलमाल ज्ञानमाल व चारित्रमाल, थूवोनजी व ईशरवारा क्षेत्र की बोलियों केे माध्यम से श्रद्धालुओं को माला पहनने का सौभाग्य मिला।


विमानोत्सव का बताया महत्व
बाल ब्रह्मचारी पंकज भैया ने विमानोत्सव का महत्व बताते हुए कहा कि श्रीजी की भक्ति हम मंदिर में कर लेते है। लेकिन ऐसे बहुत से त्रियंच गति के जीव है। उन्होंने बताया कि एक इंद्रीय से पंचेद्रिय जीवों को वीतराग भगवान के दर्शन हो जाएं और वह सदगति प्राप्त कर मोक्ष को प्राप्त हों इसलिए सालभर में एक बार श्रीजी विमानोत्सव जरुर निकालना चाहिए।


हमेशा अपना मन अच्छा रखो न जाने कब आयु कर्म का बंध हा जाए, हमारे भाव सुधरगए तो भव सुधर जाएगा। भव बिगड़ जाएगा तो नरक निगोद की यात्रा करेगेंं। हमारे भावों को गलत भावनाओं से हटाकर अच्छी भावनाओं में लगाना चाहिए।

यहां लवकुश मंदिर पर हुई अश्व प्राण प्रतिष्ठा, बांटी प्रसादी
उधर शाढ़ौरा के हनुमान टेकरी धाम के राघवेंद्र आश्रम स्थित मां जानकी एवं लव कुश मंदिर पर लवकुश युवा संगठन कुशवाह समाज द्वारा अश्व प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम महंत कपिल जी महाराज के सानिध्य में रसिक जी महाराज कमालपुर व कृष्ण गोपाल जी शास्त्री सोनेरा कला द्वारा किया गया।

विशाल भंडारे का आयोजन
चार दिवसीय कार्यक्रम गुरुवार को कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ। तत्पश्चात पंचांग पूजन, मंडप प्रवेश व ब्राह्मण पूजन के साथ अश्व के संस्कार पल्लव वास, पुष्प वास, सप्त धान्य वास, घृत वास, शैय्या वास व अन्न वास तथा अग्नि स्थापना की गई। शुक्रवार को प्राण प्रतिष्ठा व रामचरित मानस का अखंड पाठ प्रारम्भ किया गया। शनिवार को पारायण विश्राम के साथ अश्व की स्थापना, हवन व पूर्णाहुति सम्पन्न हुई। रविवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।