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350 हैंडपंप सूखे व 150 में लाइन से नीचे पानी, 100 गांवों में पानी के गंभीर हालात

पेयजल संकट: जलस्तर घटने से बढ़ी समस्या, डेढ़ किमी दूर से पानी ढो रहे लोग

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350 हैंडपंप सूखे व 150 में लाइन से नीचे पानी, 100 गांवों में पानी के गंभीर हालात

350 हैंडपंप सूखे व 150 में लाइन से नीचे पानी, 100 गांवों में पानी के गंभीर हालात

अशोकनगर। गर्मी का मौसम शुरु होते ही पेयजल की समस्या बढ़ गई है। हालत यह हैं कि जिले में 350 हैंडपंप सूख चुके हैं और 150 हैंडपंपों में लाइन से नीचे पानी चला गया है। इससे जिले के करीब 100 गांवों में पेयजल के हालात गंभीर हो चुके हैं और ग्रामीणों को एक से डेढ़ किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है।

पीएचई विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 332 हैंडपंप बंद पड़े हैं, जिनमें से 248 हैंडपंप जलस्तर घटने से सूख चुके हैं। वहीं 6 40 में से 12 सिंगल फेस पंप भी बंद पड़े हुए हैं। इसके अलावा 157 में से 11 नल-जल योजनाएं भी बंद पड़ी हैं। लेकिन पत्रिका ने आसपास के गांवों में पड़ताल की तो पीएचई विभाग के आंकड़ों से भी ज्यादा संख्या में हैंडपंप बंद पड़े मिले, जबकि विभाग के रिकॉर्ड में उन गांवों के हैंडपंप चालू दर्ज हैं। ग्रामीणों के मुताबिक जिले में 350 से ज्यादा हैंडपंप सूखे पड़े हैं और लोगों को एक से डेढ़ किमी दूर से पानी ढोना पड़ रहा है, इससे आने वाले दिनों में हालात भयावह होने की आशंका है। शिकायतें देख कलेक्टर अभय वर्मा ने नाराजगी दिखाई तो पीएचई विभाग ने चारों ब्लॉकों में शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए हैं।

रिपोर्ट: 11 माह में 245 नए हैंडपंप व 840 में बढ़ी लाइन
पीएचई विभाग के मुताबिक एक अप्रैल 2020 से अब तक जिले में 245 नए हैंडपंप लगाए जा चुके हैं और 1957 हैंडपंपों को सुधारा गया है, जिनमें से 840 हैंडपंपों में 2304 मीटर पाइप लाइन बढ़ाई गई है। जबकि हकीकत में हैंडपंप सुधार और लाइन बढ़ाने के यह आंकड़े पिछले साल के गर्मी के मौसम के हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि शिकायतों के बाद भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

पड़ताल: इन तीन गांव से जाने आंकड़ों की हकीकत
ट्रैक्टरों व बाइक से पानी ढो रहे लोग
रांवसर गांव में 18 हैंडपंप हैं, विभाग के रिकॉर्ड में सभी चालू हैं। हकीकत में 10 हैंडपंप चालू हैं, जिनमें से कई हांफने लगे हैं। चार बंद पड़े हैं, वहीं एक में डंडा नहीं तो दूसरे की मशीन गायब हैं। पेयजल योजना एक साल पहले शुरु हुई और सिर्फ शुभारंभ पर एक दिन ही पानी सप्लाई हुआ। इससे ग्रामीण ट्रैक्टरों, बाइक और साईकिलों से खेतों से पानी ढो रहे हैं।

पथरिया में छह में से बंद पड़े हैं चार हैंडपंप
पथरिया गांव में सभी छह हैंडपंप रिकॉर्ड में चालू हैं। मौके पर एक टूटा पड़ा है, दो बंद है और एक हैंडपंप में सिंगलफेस मोटर पंप फंस गया है, इससे न मोटर पंप चल रहा है और न हीं हैंडपंप। सिर्फ दो हैंडपंप चालू हैं, जिन पर पानी भरने भीड़ लग रही हैं, इससे लोग अन्य लोगों के निजी ट्यूबवैलों से पानी ढोने के लिए मजबूर हैं।


पांच में सिर्फ दो चालू, वह भी हांफ रहे
पडरिया गांव में पांच हैंडपंप हैं, पीएचई विभाग के रिकॉर्ड में सभी चालू हैं। हकीकत में एक बोरी से बंधा है और उसमें मोटर पंप लगा है लेकिन पानी नहीं आ रहा। स्कूल व मंदिर के पास के दो हैंडपंप बंद पड़े हैं ओर दो हैंडपंप चालू हैं, जो जलस्तर घटने से हाफने लगे हैं। इस कारण से लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है और अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

नागरिकों से जाने पेयजल की समस्या
- बस्ती में तीन हैंडपंप हैं तीनों बंद हैं, एक में आधा घंटे में एक ड्रम पानी आता है। एक से ड़ेढ किमी दूर खेतों से पानी ढोकर ला रहे हैं। -प्राणसिंह कुशवाह, रहवासी


- 18 हैंडपंप में से ज्यादातर बंद पड़े हैं, एक में मोटर डाली है लेकिन पानी नहीं निकल रहा है, खेतों से पानी ढोकर ला रहे हैं। -अमरसिंह मीणा, रांवसर


- मंदिर के पास व बस्ती में हैंडपंप बंद पड़ा है। ज्यादातर हैंडपंपों में आधा घंटे चलाने के बाद पानी निकल रहा है, अन्य लोगों के घरों से पानी ला रहे हैं। -विशाल रघुवंशी, डंगोराफूट