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कुछ ऐसा करो जिससे देश व समाज का गौरव बढ़े और आपका नाम भी इतिहास में दर्ज हो: मुनि अक्षयसागर

मुनिश्री से युवाओं से बोले ऐसा कभी मत करना जिससे आपके कारण देश, समाज व परिवार को लज्जित होना पड़े-युवा सम्मेलन में मुनिश्री ने किया आव्हान सबसे पहले देश व उसकी सभ्यता का सम्मान करें

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कुछ ऐसा करो जिससे देश व समाज का गौरव बढ़े और आपका नाम भी इतिहास में दर्ज हो: मुनि अक्षयसागर

कुछ ऐसा करो जिससे देश व समाज का गौरव बढ़े और आपका नाम भी इतिहास में दर्ज हो: मुनि अक्षयसागर


अशोकनगर. धर्म सभी को सुखी बनाता है। हमारा सौभाग्य है कि जिस वसुंधरा पर महान आत्माओ ने जन्म लिया वहां हमें रहने का मौका मिला है। इसे अवसर मानते हुए कुछ ऐसा करें जिससे देश समाज का गौरव बड़े और आपका नाम भी इतिहास के पन्नों में सुरक्षित दर्ज हो जाए। उक्त उदगार मुनिश्री अक्षय सागरजी महाराज ने सुभाषगंज में युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनिश्री ने कहा कि देश के लिए संस्कृति के लिए धर्म के लिए कुछ करना होगा इतना भी न कर सको तो इतना अवश्य करना कि ये देश समाज और परिवार को आपके कारण कभी लज्जित न होना पड़े और कर सको तो किसी गरीब बेसहरा की मदद जरूर कर देना क्योंकि यह मानव जन्म मिला है तो इसको सार्थक करने की जिम्मेदारी भी आप की है। इसके साथ ही मुनिश्री ने युवाओं से आव्हान किया कि वह सबसे पहले देश व उसकी सभ्यता का सम्मान करें। इस दौरान ब्रह्मचारी प्रद्युम्न भैया, विक्की भैया, मनीष भैया, समाज के अध्यक्ष रमेश चौधरी, मनीष एमपीटीसी, शैलेन्द्र श्रंगार, विपिन सिंघई, अमित लालू, राकेश जैन, संजीव जैन, आनंद कटपीस, पवन पंसारी सहित अन्य उपस्थित रहे।
पद व पैसे की पूजा में उन्नति पर विराम लग जाता है
मुनिश्री ने कहा कि जिस समाज में पद और पैसे की पूजा होती है वह समाज पतन की ओर जा रहा है उसकी उन्नति पर विराम लग गया है। समाज की प्रगति चाहते हो तो समाज में पारदर्शिता के साथ व्यवस्थाओं में बदलाव होता रहना चाहिए। पद और पैसे की पूजा पर विराम लगाते हुए समाज की तरक्की के लिए सामूहिक रूप से कदम उठाते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीव के जीवन का अंतिम लक्ष्य क्या होना चाहिए हर व्यक्ति सुख रहना चाहता है लेकिन सुख की परिभाषा पता नहीं है सुख का साधन धर्म ही है। बुद्धिमान लोग सत्य को पहचान कर धर्म की राह पकड़कर आगे बढ़ते चलें जातें हैं धर्म हमें दुखो से उठा कर सुखों में पहुंचा देता है। ऐसे धर्म को प्राप्त करने के बाद हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए आत्म तत्व की प्राप्ति।
संस्कृति के प्रति कर्तव्य का निर्वाह कर सकें
कार्यक्रम का संचालन कर रहे मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के ५०वें आचार्य पदारोहण वर्ष में युवाओं का देश समाज और संस्कृति के प्रति क्या कर्तव्य है इस विषय को लेकर मुनिश्री अक्षय सागरजी महाराज ने युवा सम्मेलन का आव्हान किया। हमारे समाज के देश सभ्यता व संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी का पालन कर सकें ऐसी सीख हम सब को लेनी है इस हेतु एक विशेष टेली फिल्म भी दिखाई गई। सम्मेलन के पहले जगत कल्याण की कामना के लिए शान्ति धारा की गई।